Alvitrips

Touris place, religious place, history, and biography information in hindi
सीताबाड़ी का इतिहास – सीताबाड़ी का मंदिर राजस्थान

सीताबाड़ी का इतिहास – सीताबाड़ी का मंदिर राजस्थान

सीताबाड़ी, किसी ने सही कहा है कि भारत की धरती के कण कण में देव बसते है ऐसा ही एक स्थान भारत के ऐतिहासिक राज्य राजस्थान के बांरा जिले की शाहबाद तहसील के केलवाड़ा गाँव के पास सीताबाड़ी नामक एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान व तीर्थ है। बडी संख्या में श्रृद्धालु और पर्यटक यहां सीताबाड़ी के मंदिर के दर्शन करने आते। बांरा से सीताबाड़ी की दूरी लगभग 44 किलोमीटर तथा कोटा से 120 और अजमेर से यह स्थान 342 किमी कि दूरी पर स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान लव और कुश का जन्म स्थान माना जाता है। यहां कई मंदिर व कुंड है। यह स्थान यहां लगने वाले प्रसिद्ध वार्षिक मेले के लिए भी जाना जाता है। अपने इस लेख में हम सीताबाड़ी का इतिहास जानेगें और सीताबाड़ी के दर्शन करेगें।

सीताबाड़ी का इतिहास मेला व दर्शनीय स्थल

किसी भी पर्व विशेष पर अपने शीतल अन्तस्तल में सहस्त्रों श्रृद्धालुओं को भर लेने वाली सीताबाड़ी एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसके अति प्राचीन होने के कारण सीताबाड़ी का निर्माण किसने कराया या कैसे हुआ, इस संबंधी शिलालेख कहीं उपलब्ध नहीं है। परंतु जितने भी प्राचीन भग्नावशेष यहां है, उन्हें देखकर सीताबाड़ी के इतिहास का अंदाजा लगाया जा सकता है। भग्नावशेषो को देखकर लगता कि यह स्थल बारहवीं, तेरहवीं शताब्दी में स्थापित हुआ होगा। एक प्रचलित किवदंती के अनुसार कुछ लोगों का मानना है की इसका निर्माण किसी डाकू ने करवाया था। और एक बड़ा भू भाग इसके क्षेत्र का हिस्सा था। जो भी हो लेकिन आज श्रृद्धालुओं में इस स्थान का बहुत बडा महत्व है।

सीताबाड़ी के सुंदर दृश्य
सीताबाड़ी के सुंदर दृश्य

जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है। सीता अर्थात भगवान श्री राम की पत्नी “माता सीता” और बाड़ी का अर्थ वाटिका या घर, मकान से है। अतः सीताबाड़ी का अर्थ हुआ सीता की वाटिका। अतः जिससे यह ज्ञात होता है कि इस स्थान पर सीता जी ने वास किया था। कहते है कि यहां वाल्मीकि ऋषि का आश्रम था। जब भगवान श्रीराम चंद्र जी ने माता सीता का त्याग किया था। तब उनके निर्वासन के दौरान देवर लक्ष्मण में ने उनकी सेवा के लिए उन्हें वाल्मीकि ऋषि आश्रम मे छोड़ा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार सीता जी के यहां वास अवधि के दौरान ही लव और कुश का जन्म भी यही हुआ था। इसलिए इसे लव कुश की नगरी भी कहा जाता है। श्रीराम चंद्र जी तथा लव और कुश के बीच युद्ध भी यही हुआ था। इसलिए इस स्थान का महत्व अधिक समझा जाता हैं। और यहां कई दर्शनीय स्थल है।

केलवाड़ा गाँव से ही घने हरेभरे पेडों का झुड़ सा दिखाई देने लगता है। बसों, कारो, तांगों, रिक्शा आदि द्वारा वहां आसानी से पहुचा जा सकता है। यहां पहुंच कर यात्री सबसे पहले लक्ष्मण कुंड पहुचते है। लक्ष्मण कुंड लगभग 20-25 मीटर का वर्गाकार पानी से भरा कुण्ड है। इसमें साल के बारह महीने पानी रहता है। जिसके तीनों ओर तीन तिवारिया है और पूर्व की ओर आमुख लक्ष्मण जी का विशाल मंदिर है। जिसके गोल गुम्बद की प्राचीन नक्काशी बड़ी आकर्षक है। गुम्बद के अगले भाग पर दो सिंह प्रतिमाएं है। मंदिर के गर्भगृह में लक्ष्मण जी की मनुष्य के कद बराबर प्रतिमा है। यह प्रतिमा सुसज्जित वस्त्राभूषण, हाथ में तीर कमान लिए सजीव सी प्रतीत होती है। कहा जाता है कि सीता जी के अरण्य प्रवास काल में उनके स्नान के लिए लक्ष्मण जी ने ही यहां पाताल गंगा को प्रकट किया था। जिसे बभुका भी कहते है। पहले यह धारा निर्बाध रूप से अस्त व्यस्त बहा करती थी कालांतर मे स्थायी रूप से संचित रहने के लिए इस जल को कुंड का रूप दे दिया गया है। पर्व और यहां लगने वाले मेले आदि के अवसरों पर हजारों श्रृद्धालु यहां दर्शन करने के लिए आते है। और कुंड का पानी पीते है। लोगों का मानना है कि लक्ष्मण कुंड का पानी पीने से रोगों से छुटकारा मिलता है। इस कुंड पर नहाना और कपड़े आदि धोना निषेध है।

सीताबाड़ी को कुंडो की वाटिका भी कहा जाए तो भी अतिशयोक्ति नहीं होगी। छोटे बडें यहां कुल मिलाकर सात कुंड है। जिनमें से तीन कुंड ही प्रधान कुडं है। पहला सीता कुंड, दूसरा सूरज कुंड और तीसरा लक्ष्मण कुंड, इसके अलावा राम कुंड, लव कुश कुंड, वाल्मीकि कुंड आदि भी महत्व के है।



सूरज कुंड यहां का सर्वोत्तम मनोहारी स्वच्छ जल से भरा हुआ 2-3 क्षेत्र का संगमरमरी धरातल वाला कांच के चकौर कटोरे सा सूरज कुंड है। जिसमें एक साथ 15-20 स्नानर्थियों का समूह एक में ऊतर जाता है। उनके बाहर आते ही फिर दूसरा फिर तीसरा समूह यही क्रम चलता रहता है। कार्तिक पूर्णिमा के पर्व पर इस कुंड के पानी की निर्मलता में कोई अंतर नहीं आता। इस कुंड के पानी से किसी काल में कुष्ठ रोग भी ठीक हो जाया करते थे। इस कुंड के चारों ओर द्विवारियां है और एक द्विवारी में शिव प्रतिमा स्थापित है। कुछ लोगों का कहना है कि यहां बारह महीने एक जीवित सर्प चक्कर लगाया करता है। मगर वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचता।


सीताबाड़ी के सुंदर दृश्य
सीताबाड़ी के सुंदर दृश्य

पौराणिक महत्व के संदर्भ में पता नहीं वस्तु सत्य क्या है। लेकिन लोग अभी तक भी इस स्थल को वाल्मीकि आश्रम के नाम से सिर झुकाते है। जहाँ पर अग्नि परिक्षा के उपरांत भी महासती सीता को एक बार पुनः परित्याग का कष्ट वहन करने के निमित्त आना पड़ा था। सीता की सब प्रकार की सुख सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए लक्ष्मण, अरण्य वासी, वाल्मीकि ऋषि आदि ने सहयोग कर छांव, पानी आदि की सभी व्यवस्थाएं यहां कर दी थी। यही पर लव कुश का जन्म हुआ और उनको शास्त्र ज्ञान एवं शस्त्र विद्या दी गई थी।


रामचरित के उसी मूल भाग को लेकर हजारों यात्री कार्तिक पूर्णिमा पर यहां स्नान करने आते है। चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण पर तो यहां मेला सा लग जाता है। कई लोग सीता माता और लक्ष्मण जी की मनौती मानकर अपने बच्चों के मुंडन और यज्ञोपवीत आदि संस्कार तक यही पूर्ण कराते है। वैसाख वदी तृतीया से पूर्णमासी तक सीताबाड़ी मे पशुओं का एक विशाल मेला भी लगता है। मेले के समय में यहां की छटा विशेष रूप से दर्शनीय होती है। यह मेला व स्थान आदिवासी सहरिया जनजाति तीर्थ स्थान व मेला आदिवासियों का महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है

यहां से लगभग 5 किलोमीटर उत्तर मे बिल्कुल निर्जन और बंजर धरती मे एक स्थल पर ठंडे पानी की धारा झरने के दृश्य समान जमीन के भीतर से मीटर भर ऊंची उछाल के साथ गिरती है। इसे बांण गंगा कहते है। सीताजी को प्यास लगने पर लक्ष्मण जी ने धरती पर बांण मारकर यही गंगा का आह्वान किया था। इसका पानी धीरे धीरे होकर सीधा सीताबाड़ी की ओर आमुख हो सारण में मिल जाता है। यह सारण (झरनी) कभी नहीं सुखती है। और अब तो इसके पानी से 5-6 हजार बीसा जमीन में सिचांई भी की जाती है।


पर्णकुटी (सीता कुटी) यह सूरज कुंड से पूर्व दिशा की ओर एक किलोमीटर की दूरी पर एक कुटिया है। जो संपूर्ण वृक्षों की सूखी टहनियों से निर्मित है एवं पत्तों से आच्छादित है। टहनियों की गुंथावट इस प्रकार मजबूत है। जो न हवा से हिलती है और न ही आंधी से गिरती है। कुटिया के आंतरिम कक्ष में एक चकौर पत्थर के टुकड़े पर दो छोटे छोटे पद चिन्ह है। जिन्हें सीता के चरण के चरण मानकर पूजा जाता है।

यहां एक और मुख्य दर्शनीय स्थल है हांके का थम्भ सीताबाड़ी से तीन किमी की दूरी पर दक्षिण पूर्व में घना जंगल है। इतना घना की बारह महीने सूर्य की किरण भूतल को नहीं छू सके। यही पर शिकार का हांका लगाया जाता था। राजा के राज्य में केवल कोटा नरेश को ही इस जंगल में शिकार करने का अधिकार था। यह अधिकार अब राज्य सरकार के हाथ में है। इस जंगल मे शेर, चीते, भालू, बारहसिंगा सभु पशु विचरण करते है।


अध्धयन के आधार पर इस क्षेत्र की सीमा मध्यप्रदेश से अधीक समीप लगती है। पगडंडियों के छोटे मार्ग से चलने पर लगभग बारह किलोमीटर की दूरी पर ही मध्यप्रदेश के छोटे नगर गुना पहुंचा जा सकता है। और ये ही पगडंडियां आगे चलकर दण्डकारण्य वन में जा मिलती है। जहाँ वास्तव में लक्ष्मण जी (रामचरितमानस के आधार पर) सीता को परित्यक्त स्थिति में छोड़ गए थे।


जहाँ एक ओर सीताबाड़ी मई जून की तपती दोपहरियो में अपनी प्राकृतिक शीतलता के लिए प्रसिद्ध है। वही पर कुछ ऐसे अप्रतिम चमत्कार भी रखती है। जिसके कारण इसका वैभव झुठलाया नहीं जा सकता। यह सम्मपूर्ण दो किलोमीटर के क्षेत्र से घिरी वाटिका यदि आम वाटिका कही जाएं तो न्याय संगत ही होगा। क्योंकि यहां सत प्रतिशत वृक्ष आम के ही है। और संभवतः सम्पूर्ण भारत में यह एक मात्र ऐसा स्थल होगा, जहाँ पर आम जैसा मीठा फल निशुल्क खाने को मिलता है। वहां पर न तो कोई आम विक्रेता है और न खरीदार सब अपनी इच्छा से जैसा और जितना चाहे आम खा सकता है। मगर हां ध्यान रहे यह आम गठरी बांध कर घर नहीं ले जाया जा सकता। यदी कोई चोरी छीपे से ले भु गया तो सीताबाड़ी की सीमा लांघते ही एक दो घंटे में वे सभी आम सड़ जाते है।

कुल मिलाकर सीताबाडी एक प्राकृतिक दर्शनीय तीर्थ स्थल है। जो अपनी धार्मिकता, नैतिकता, चमत्कार आदि कारणों से आज भी लाखों पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

प्रिय पाठकों आपको हमारा यह लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं। यह जानकारी आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते है

प्रिय पाठकों यदि आपके आसपास कोई ऐसा धार्मिक, ऐतिहासिक या पर्यटन महत्व का स्थान है और आप उसके बारे मे पर्यटकों को बताना चाहते है तो आप हमारे submit a post संस्करण मे जाकर अपना लेख कम से कम 300 शब्दों में लिख सकते है। हम आपके द्वारा लिखे गए लेख को आपकी पहचान के साथ अपने इस प्लेटफार्म पर शामिल करेंगे।

राजस्थान पर्यटन पर आधारित हमारे यह लेख भी जरूर पढ़े:–

पश्चिमी राजस्थान जहाँ रेगिस्तान की खान है तो शेष राजस्थान विशेष कर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान की छटा अलग और
जोधपुर का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे मन में वहाँ की एतिहासिक इमारतों वैभवशाली महलों पुराने घरों और प्राचीन
भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद्ध शहर अजमेर को कौन नहीं जानता । यह प्रसिद्ध शहर अरावली पर्वत श्रेणी की
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने हेदराबाद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल व स्मारक के बारे में विस्तार से जाना और
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने जयपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हवा महल की सैर की थी और उसके बारे
प्रिय पाठको जैसा कि आप सभी जानते है। कि हम भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद् शहर व गुलाबी नगरी
प्रिय पाठको जैसा कि आप सब जानते है। कि हम भारत के राज्य राजस्थान कीं सैंर पर है । और
पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार
जैसलमेर के दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
जैसलमेर भारत के राजस्थान राज्य का एक खुबसूरत और ऐतिहासिक नगर है। जैसलमेर के दर्शनीय स्थल पर्यटको में काफी प्रसिद्ध
अजमेर का इतिहास
अजमेर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्राचीन शहर है। अजमेर का इतिहास और उसके हर तारिखी दौर में इस
अलवर के पर्यटन स्थल के सुंदर दृश्य
अलवर राजस्थान राज्य का एक खुबसूरत शहर है। जितना खुबसूरत यह शहर है उतने ही दिलचस्प अलवर के पर्यटन स्थल
उदयपुर दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
उदयपुर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर है। उदयपुर की गिनती भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलो में भी
नाथद्वारा दर्शन धाम के सुंदर दृश्य
वैष्णव धर्म के वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों, मैं नाथद्वारा धाम का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। नाथद्वारा दर्शन
कोटा दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
चंबल नदी के तट पर स्थित, कोटा राजस्थान, भारत का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। रेगिस्तान, महलों और उद्यानों के
कुम्भलगढ़ का इतिहास
राजा राणा कुम्भा के शासन के तहत, मेवाड का राज्य रणथंभौर से ग्वालियर तक फैला था। इस विशाल साम्राज्य में
झुंझुनूं के पर्यटन स्थल के सुंदर दृश्य
झुंझुनूं भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख जिला है। राजस्थान को महलों और भवनो की धरती भी कहा जाता
पुष्कर तीर्थ के सुंदर दृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर जिले मे स्थित पुष्कर एक प्रसिद्ध नगर है। यह नगर यहाँ स्थित प्रसिद्ध पुष्कर
करणी माता मंदिर देशनोक के सुंदर दृश्य
बीकानेर जंक्शन रेलवे स्टेशन से 30 किमी की दूरी पर, करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक शहर
बीकानेर के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
जोधपुर से 245 किमी, अजमेर से 262 किमी, जैसलमेर से 32 9 किमी, जयपुर से 333 किमी, दिल्ली से 435
जयपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भारत की राजधानी दिल्ली से 268 किमी की दूरी पर स्थित जयपुर, जिसे गुलाबी शहर (पिंक सिटी) भी कहा जाता
सीकर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सीकर सबसे बड़ा थिकाना राजपूत राज्य है, जिसे शेखावत राजपूतों द्वारा शासित किया गया था, जो शेखावती में से थे।
भरतपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भरतपुर राजस्थान की यात्रा वहां के ऐतिहासिक, धार्मिक, पर्यटन और मनोरंजन से भरपूर है। पुराने समय से ही भरतपुर का
बाड़मेर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
28,387 वर्ग किमी के क्षेत्र के साथ बाड़मेर राजस्थान के बड़ा और प्रसिद्ध जिलों में से एक है। राज्य के
दौसा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
दौसा राजस्थान राज्य का एक छोटा प्राचीन शहर और जिला है, दौसा का नाम संस्कृत शब्द धौ-सा लिया गया है,
धौलपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
धौलपुर भारतीय राज्य राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है और यह लाल रंग के सैंडस्टोन (धौलपुरी पत्थर) के लिए
भीलवाड़ा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भीलवाड़ा भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख ऐतिहासिक शहर और जिला है। राजस्थान राज्य का क्षेत्र पुराने समय से
पाली के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
पाली राजस्थान राज्य का एक जिला और महत्वपूर्ण शहर है। यह गुमनाम रूप से औद्योगिक शहर के रूप में भी
जालोर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
जोलोर जोधपुर से 140 किलोमीटर और अहमदाबाद से 340 किलोमीटर स्वर्णगिरी पर्वत की तलहटी पर स्थित, राजस्थान राज्य का एक
टोंक राजस्थान के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
टोंक राजस्थान की राजधानी जयपुर से 96 किमी की दूरी पर स्थित एक शांत शहर है। और राजस्थान राज्य का
राजसमंद पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
राजसमंद राजस्थान राज्य का एक शहर, जिला, और जिला मुख्यालय है। राजसमंद शहर और जिले का नाम राजसमंद झील, 17
सिरोही के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सिरोही जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित है। यह उत्तर-पूर्व में जिला पाली, पूर्व में जिला उदयपुर, पश्चिम में
करौली जिले के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
करौली राजस्थान राज्य का छोटा शहर और जिला है, जिसने हाल ही में पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है, अच्छी
सवाई माधोपुर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सवाई माधोपुर राजस्थान का एक छोटा शहर व जिला है, जो विभिन्न स्थलाकृति, महलों, किलों और मंदिरों के लिए जाना
नागौर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
राजस्थान राज्य के जोधपुर और बीकानेर के दो प्रसिद्ध शहरों के बीच स्थित, नागौर एक आकर्षक स्थान है, जो अपने
बूंदी आकर्षक स्थलों के सुंदर दृश्य
बूंदी कोटा से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शानदार शहर और राजस्थान का एक प्रमुख जिला है।
बारां जिले के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
कोटा के खूबसूरत क्षेत्र से अलग बारां राजस्थान के हाडोती प्रांत में और स्थित है। बारां सुरम्य जंगली पहाड़ियों और
झालावाड़ पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
झालावाड़ राजस्थान राज्य का एक प्रसिद्ध शहर और जिला है, जिसे कभी बृजनगर कहा जाता था, झालावाड़ को जीवंत वनस्पतियों
हनुमानगढ़ पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
हनुमानगढ़, दिल्ली से लगभग 400 किमी दूर स्थित है। हनुमानगढ़ एक ऐसा शहर है जो अपने मंदिरों और ऐतिहासिक महत्व
चूरू जिले के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
चूरू थार रेगिस्तान के पास स्थित है, चूरू राजस्थान में एक अर्ध शुष्क जलवायु वाला जिला है। जिले को। द
गोगामेड़ी धाम के सुंदर दृश्य
गोगामेड़ी राजस्थान के लोक देवता गोगाजी चौहान की मान्यता राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल, मध्यप्रदेश, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों
वीर तेजाजी महाराज से संबंधी चित्र
भारत में आज भी लोक देवताओं और लोक तीर्थों का बहुत बड़ा महत्व है। एक बड़ी संख्या में लोग अपने
शील की डूंगरी के सुंदर दृश्य
शीतला माता यह नाम किसी से छिपा नहीं है। आपने भी शीतला माता के मंदिर भिन्न भिन्न शहरों, कस्बों, गावों
गलियाकोट दरगाह के सुंदर दृश्य
गलियाकोट दरगाह राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सागबाडा तहसील का एक छोटा सा कस्बा है। जो माही नदी के किनारे
श्री महावीरजी धाम राजस्थान के सुंदर दृश्य
यूं तो देश के विभिन्न हिस्सों में जैन धर्मावलंबियों के अनगिनत तीर्थ स्थल है। लेकिन आधुनिक युग के अनुकूल जो
कोलायत धाम के सुंदर दृश्य
प्रिय पाठकों अपने इस लेख में हम उस पवित्र धरती की चर्चा करेगें जिसका महाऋषि कपिलमुनि जी ने न केवल
मुकाम मंदिर राजस्थान के सुंदर दृश्य
मुकाम मंदिर या मुक्ति धाम मुकाम विश्नोई सम्प्रदाय का एक प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थान माना जाता है। इसका कारण
कैला देवी मंदिर फोटो
माँ कैला देवी धाम करौली राजस्थान हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यहा कैला देवी मंदिर के प्रति श्रृद्धालुओं की
ऋषभदेव मंदिर के सुंदर दृश्य
राजस्थान के दक्षिण भाग में उदयपुर से लगभग 64 किलोमीटर दूर उपत्यकाओं से घिरा हुआ तथा कोयल नामक छोटी सी
एकलिंगजी टेम्पल के सुंदर दृश्य
राजस्थान के शिव मंदिरों में एकलिंगजी टेम्पल एक महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय मंदिर है। एकलिंगजी टेम्पल उदयपुर से लगभग 21 किलोमीटर
हर्षनाथ मंदिर के सुंदर दृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के सीकर से दक्षिण पूर्व की ओर लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर हर्ष नामक एक
रामदेवरा धाम के सुंदर दृश्य
राजस्थान की पश्चिमी धरा का पावन धाम रूणिचा धाम अथवा रामदेवरा मंदिर राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक तीर्थ है। यह
नाकोड़ा जी तीर्थ के सुंदर दृश्य
नाकोड़ा जी तीर्थ जोधपुर से बाड़मेर जाने वाले रेल मार्ग के बलोतरा जंक्शन से कोई 10 किलोमीटर पश्चिम में लगभग
केशवरायपाटन मंदिर के सुंदर दृश्य
केशवरायपाटन अनादि निधन सनातन जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर भगवान मुनीसुव्रत नाथ जी के प्रसिद्ध जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र
गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य
राजस्थान राज्य के दक्षिणी भूखंड में आरावली पर्वतमालाओं के बीच प्रतापगढ़ जिले की अरनोद तहसील से 2.5 किलोमीटर की दूरी
रानी सती मंदिर झुंझुनूं के सुंदर दृश्य
सती तीर्थो में राजस्थान का झुंझुनूं कस्बा सर्वाधिक विख्यात है। यहां स्थित रानी सती मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां सती
ओसियां के दर्शनीय स्थल
राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले जोधपुर में एक प्राचीन नगर है ओसियां। जोधपुर से ओसियां की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है।
डिग्गी कल्याण जी मंदिर के सुंदर दृश्य
डिग्गी धाम राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर टोंक जिले के मालपुरा नामक स्थान के करीब
रणकपुर जैन मंदिर के सुंदर दृश्य
सभी लोक तीर्थों की अपनी धर्मगाथा होती है। लेकिन साहिस्यिक कर्मगाथा के रूप में रणकपुर सबसे अलग और अद्वितीय है।
लोद्रवा जैन मंदिर के सुंदर दृश्य
भारतीय मरूस्थल भूमि में स्थित राजस्थान का प्रमुख जिले जैसलमेर की प्राचीन राजधानी लोद्रवा अपनी कला, संस्कृति और जैन मंदिर
गलताजी टेम्पल जयपुर के सुंदर दृश्य
नगर के कोलाहल से दूर पहाडियों के आंचल में स्थित प्रकृति के आकर्षक परिवेश से सुसज्जित राजस्थान के जयपुर नगर के
सकराय माता मंदिर के सुंदर दृश्य
राजस्थान के सीकर जिले में सीकर के पास सकराय माता जी का स्थान राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक

1 comment found

Leave comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *.