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सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय – सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी, शतक व रिकॉर्ड

सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय – सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी, शतक व रिकॉर्ड

रिकॉर्ड के बादशाह, क्रिकेट के भगवान, मास्टर ब्लास्टर आदि नामों से मशहूर सचिन तेंदुलकर आज की तारीख में विश्व क्रिकेट में सबसे सम्मानित नाम है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30000 से भी अधिक रन बनाने वाले सचिन के नाम इतने अधिक रिकॉर्ड्स है कि निकट भविष्य में किसी भी खिलाड़ी द्वारा उनके सभी रिकॉर्ड तोड़ पाना संभव नहीं है। क्रिकेट में उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न तथा भारत रत्न जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार पाने वाले वह पहले क्रिकेट खिलाड़ी है। अपने इस लेख में हम सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय, सचिन तेंदुलकर की जीवनी, सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी, सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड, सचिन तेंदुलकर के शतक, और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी इन हिन्दी

सचिन तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुम्बई महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर तथा माता का नाम रजनी तेंदुलकर था। उनके पिता स्वर्गीय रमेश तेंदुलकर एक मराठी उपन्यासकार और कवि थे। उनकी माता रजनी तेंदुलकर एक बीमा कंपनी में काम करती थीं और रमेश तेंदुलकर की दूसरी पत्नी थीं। सचिन तेंदुलकर का विवाह 24 मई 1995 को अंजलि मेहता के साथ हुआ। अंजलि एक शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और सचिन तेंदुलकर से छह साल बड़ी है। वह बिजनेसमैन आनंद मेहता और एनाबेल मेहता की बेटी हैं। अंजलि ने दो बच्चों और घर की देखभाल करने के लिए 1999 में अपना प्रोफेशनल करियर छोड़ दिया। अंजलि हमेशा सचिन को सपोर्ट करती रही है।


भारतीय क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले सचिन तेंदुलकर क्रिकेट जगत में एक जीते जागते मिथक बन गए है। केवल क्रिकेट ही नहीं पूरे खेल जगत में सचिन जैसे खिलाड़ी एक दो ही होते है। 1989 में पाकिस्तान दौरे पर मात्र 16 साल की आयु में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखने के बाद वे आज तक सफलताएं हासिल करते रहे। सचिन ने ग्यारह वर्ष की आयु में बल्ला थाम लिया था। शिवाजी पार्क में रामाकांत अचरेकर की देखरेख और मुम्बई की विशेष संस्कृति में किशोर सचिन का विकास हुआ। लगभग 13 साल की आयु में सचिन ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी प्रतिभा दिखा दी। जूनियर स्तर पर धाक जमाने के बाद सचिन ने राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में प्रभावशाली बल्लेबाजी की। रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी प्रतियोगिताओं में शतक बनाकर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। टेस्ट हो या वनडे उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से अब सन्यास ले लिया है। विपक्षियों, दर्शकों और विशेषज्ञों की आंखे उन्हीं पर टिकी रहती थी। क्योंकि एक विकेट कीपर को छोड़कर सचिन सारी भूमिकाएं निभाने में सक्षम थे। उनकी सफलताएं और कीर्तिमान समकालीन व युवा खिलाडियों के लिए प्रेरणास्रोत है। अपने कैरियर के प्रारंभिक दौर में सचिन ने हैरिस शील्ड प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में मित्र और सहपाठी विनोद कांबली के साथ 644 रन की नाबाद साझेदारी का विश्व रिकॉर्ड बनाया। शारदा श्रम विद्या मंदिर के दोनों छात्रों की लोकप्रियता केवल मुम्बई ही नहीं सारे संसार में फैल गई।

सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर


एक समय जब 1991 में भारतीय टीम के आस्ट्रेलियाई दौरे पर महान क्रिकेट खिलाड़ी डॉन ब्रैडमैन द्वारा यह पूछना कि क्या विनोद कांबली नहीं आया कांबली के लिए अतिरिक्त और महान प्रशंसा थी। उस समय कांबली के वनडे श्रृंखला के लिए बाद मे शामिल किया गया, वह टेस्ट सीरीज में नहीं खेला था।
घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के विरुद्ध खेलते हुए सचिन ने शानदार प्रदर्शन किया था। सचिन शतक की ओर बढ़ रहा था लेकिन उस दिन दूसरे छोर पर कोई बल्लेबाज टिक नहीं रहा था। आखिर गुरशरण सिंह टूटी बांह के साथ क्रीज पर उतरे और सचिन को शतक पूरा करने में मदद की। चयनकर्ताओं के अनुसार उसी शाम पाकिस्तान दौरे के लिए भारत की टीम में उसे चुना गया। जबकि विशेषज्ञ सचिन को पाक दौरे पर भेजने के पक्ष में नहीं थे। किंतु घरेलु क्रिकेट में सचिन के लगातार और बेहतरीन प्रदर्शन की उपेक्षा करने का खतरा चयनकर्ता नहीं उठा सकते थे।


अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी की शुरुआत अच्छी नहीं हुई। वकार यूनूस ने कराची के मैच में मात्र 15 रन पर सचिन को आउट कर दिया। पर फैसलाबाद में दूसरी दौर में 59 रन बनाकर उन्होंने अपनी क्षमता जग जाहिर कर दी। तभी तो स्यालकोट में वकार की गेंद नाक पर लगने और खून निकलने के बावजूद वे मैदान पर डटे रहे। फिर अर्द्धशतक बनाकर मैच ड्रा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस धैर्य, साहस और दृढ़ता को देखकर पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान ने भी उनकी प्रशंसा की।
अठारह साल का होने से पहले शतक बनाने का रिकॉर्ड सचिन ने इंग्लैंड के विरूद्ध मैनचेस्टर में पहले टेस्ट में दिखाया। चोटी के बल्लेबाजों के आउट हो जाने पर सचिन ने मनोज प्रभाकर के साथ पहली पारी को संवारा और फिर आक्रमण किया। सचिन ने 117 रन की पारी खेली और वह मैच ड्रा हो गया। इस शानदार बल्लेबाजी के लिए सचिन को मैन ऑफ द मैच का सम्मान मिला। इंग्लिश क्रिकेट विशेषज्ञ लिटिल वंडर उनकी बल्लेबाजी से चकित थे जो उनकी आयु को झुठलाती जान पड़ती थी।

सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर


इंग्लैंड के बाद यही करिश्मा आस्ट्रेलिया वालो ने भी सिडनी और पर्थ के मैदानों पर देखा। वहा भी उनकी शतकीय पारी ने सबको प्रभावित किया। भारत के इस खिलाड़ी ने आस्ट्रेलिया का यह सिलसिला दक्षिण अफ्रीका के पहले दौरे पर भी जारी रखा। और 19 टेस्ट पारियों में एक हजार रन बनाए। इस कम आयु में टेस्ट जगत में यह कीर्तिमान बनाने वाले वह पहले बल्लेबाज रहे। जिसके इस छोटे कद की बल्लेबाजी के सामने विश्व रिकॉर्ड बौने हो रहे है। आज सचिन तेंदुलकर की गिनती ऊंचे दर्जे के खिलाड़ियों जैसे, डॉन ब्रैडमैन, सुनील गावस्कर, बोर्डर, रिचर्ड्स जैसे महान बल्लेबाजों में होती है। अक्सर गेंदबाज उन पर हावी नहीं हो पाते क्योंकि उनकी बल्लेबाजी में लय और आकर्षण था। वे केवल गेंदबाज पर हावी ही नहीं होते थे बल्कि टीम का फायदा भी देखते थे।


1997 में वेस्टइंडीज दौरे पर 88 रन बनाने में तीन घंटे लग गए तो 179 रन व सबसे तेज शतक नागपुर सिर्फ 158 गेंदों में 212 के अंदर बना लिए। 1999 में दोहरा शतक 217 रन उन्होंने न्यूजीलैंड के विरूद्ध बनाया। सचिन ने 84 टेस्ट मैचों में 6919 रन बनाए, इनमें आधे रन तो उनके 25 शतकों से थे। सचिन ने टेस्ट मैचों की तरह वनडे क्रिकेट में भी अपनी पहचान बनाई। 1992 में अपने पहले विश्वकप में मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 6 मैचों में 269 रन बनाए थे। इनमें तीन अर्द्धशतक भी शामिल थे। 1991 में सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू न्यूजीलैंड दौरे पर चोटग्रस्त हो गए। ऐसी गम्भीर स्थिति में सचिन ने यह दायित्व सम्भाला। सचिन के अच्छे प्रदर्शन से टीम चार टूर्नामेंट जीतने में सफल हुई।


1994 के प्रदर्शन को सचिन ने 1998 में दोहराया और मौहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में भारत ने लगातार पांच मैच जीते। सचिन के 1996 के प्रदर्शन को नहीं भुलाया जा सकता। जब उन्होंने 7 मैचों में दो शतक और तीन अर्द्धशतक की मदद से 87.17 की औसत से 523 रन बनाए। उनका यह प्रदर्शन तो अच्छा था परंतु भारत विश्वकप नहीं जीत सका। इस समय तक क्रिकेट की दुनिया में टेस्ट हो या वनडे सचिन तेंदुलकर छा गए थे। यही वजह थी कि 1999 के वर्ल्डकप से पहले सचिन की बल्लेबाजी की चर्चा गर्म थी। टूर्नामेंट के दौरान ही सचिन के पिता का निधन हो गया। वे भारत लौट आएं पर वापस पहुंचकर कीनिया के विरुद्ध शतक बनाया। वनडे क्रिकेट में सचिन ने कई महत्वपूर्ण पारियां खेली जिनमें एक न्यूजीलैंड के विरूद्ध रही। हैदराबाद में 186 रन की नाबाद पारी के दौरान उन्होंने 19 चौके व 6 छक्के लगाएं। इसके अलावा राहुल द्रविड़ के साथ 331 रन की साझेदारी करके एक रिकॉर्ड भी बनाया। और इसी साल 1998 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध इंदौर के वनडे मैच में दस हजार रन पूरा करके वे दुनिया के नम्बर वन बल्लेबाज बन गए। और इसी मौके पर उन्होंने 28 वां शतक भी बनाया था।

सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर


1996 में सचिन तेंदुलकर को पहली बार कप्तानी सौंपी गई। नंबर वन बल्लेबाज ने टीम का नेतृत्व संभाला और आस्ट्रेलिया के विरूद्ध दिल्ली टेस्ट में भारत को जीत दिलाई। पर उन्हें कप्तानी अधिक रास नहीं आई और 1997 के वेस्टइंडीज दौरे के बाद सचिन ने स्वेच्छा से कप्तानी छोड़ दी। 1999 के वर्ल्डकप के बाद दोबारा कप्तानी संभालने का जिम्मा सचिन के पास आ गया। लगभग साल भी नहीं बीता था कि उन्होंने स्वयं पद त्यागने की घोषणा करके उन्होंने क्रिकेट जगत को हैरत में डाल दिया। असल मे आस्ट्रेलिया दौरे 1999-2000 पर टीम के घटिया प्रदर्शन और आलोचनाओं को लेकर सचिन खुश नहीं थे। उन्हें यह भी महसूस हो रहा था कि कप्तानी के दबाव के कारण उनका खेल प्रभावित हो रहा है। इसलिए दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध घरेलू श्रृंखला शुरु होने से पहले अपना फैसला सुना दिया। यह भी सचिन के चरित्र की महानता ही है कि जिस पद को पाने के लिए प्रत्येक खिलाड़ी के मन में लालसा होती है उस पद उन्होंने स्वेच्छा से ठुकरा दिया।


सचिन के क्रिकेट जीवन से एक अद्भुत कीर्तिमान जुड़ा हुआ है। उनकी सफलताओं, क्रिकेट मैदान टर उनके कारनामों और खेल में आकर्षण के साथ साथ उनके सौम्य व्यक्तित्व के प्रभाव के कारण लोकप्रिय अंग्रेजी पत्रिका टाइम्स भी अछूती नहीं रही उसने भी सचिन को अपने मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया। यह गौरव पाने वाले सचिन एकमात्र भारतीय खिलाड़ी है। सचिन उन गौरव प्राप्त लोगों में है जिन्हें महानतम बल्लेबाज सर डोनाल्ड ब्रेडमैन से मिलने का अवसर मिला। 1998 में अपने 90वें जन्मदिन पर उन्होंने स्वयं सचिन तेंदुलकर को आमंत्रित किया और उनसे मिले। उनका मानना था कि सचिन उनके जैसा बल्लेबाज हैं। वहां शेन वार्न भी उपस्थित थे, यह गौरव सचिन से पहले सुुुनील गावस्कर ने भी पाया।


1994-95 में भारत का दौरा करने वाली वेस्टइंडीज की टीम के कप्तान कोर्टनी वाल्श सचिन से इतने प्रभावित हुए कि जब उनसे पूछा गया कि वे भारत से क्या संजोकर ले जाना चाहेंगे तो वाल्श का संक्षिप्त उत्तर था, सचिन तेंदुलकर। और 1998 की लगातार पांच प्रतियोगिताएँ जीतने के बाद कप्तान अजहरुद्दीन ने भी सचिन की भूमिका को सराहा और स्वीकार किया। सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को हुआ था। वे भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक स्ट्रोक खिलाड़ी है। सचिन ने 18 दिसंबर, 1989 को पाकिस्तान के विरूद्ध गुजरावाला में एक दिवसीय मैचों में खेलना प्रारंभ कर अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत की थी। एक दिवसीय मैचों में प्रथम शतक 9 सितंबर 1994 को कोलंबो में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध 79वें एक दिवसीय मैच में 110 रन बनाकर लगाया था।

21 जुलाई 2004 को कोलम्बो में एशिया कप क्रिकेट के श्रीलंका के विरूद्ध खेले गए भारत के एक मैच मे सचिन को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सचिन का यह 50वां मैन ऑफ द मैच पुरस्कार था, एक दिवसीय क्रिकेट में मैन ऑफ द मैच पुरस्कारों का अर्द्धशतक बनाने वाले सचिन विश्व के पहले क्रिकेटर है। टेस्ट शतक के साथ तेंदुलकर ने टेस्ट शतकों में डॉन ब्रैडमैन को पीछे छोड़ दिया। ढाका टेस्ट 10 दिसंबर 2004 में सचिन ने सुनील गावस्कर के 34 टेस्ट शतकों के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की सुनील गावस्कर ने 34 शतक 125 टेस्ट मैचों में बनाएं थे, जबकि सचिन ने 119वें टेस्ट में बनाए। नवंबर 2009 तक 436 मैचों में 45 शतक 91 अर्द्धशतक सर्वाधिक रन 186 और कुल रनों की संख्या 17178 थी। सचिन ने नवंबर 2009 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में तीस हजार रन पूरा किया। फरवरी 2010 मे सचिन ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय मैच में दोहरा शतक लगाया। 8 नवंबर 2011 को सचिन ने टेस्ट मैच में 15000 रन पूरे करने वाले प्रथम बल्लेबाज बने। सचिन ने 2012 में टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में सबसे अधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया।


2011 में वर्ल्डकप में सचिन ने 53.55 के औसत से 482 रन बनाएं, और वर्ल्डकप के फाइनल में श्रीलंका की टीम को हराकर भारत को 28 सालों के बाद विश्व विजयी बनाया। सचिन ने इस विजय के बाद कहा — सच में यह जीत मेरी पूरी जिंदगी में न भूलने वाला पल है, मै खुशी के मारे अपने आंसुओं को रोक नहीं सका। सचिन ने 16 मार्च 2012 को मीरपुर में आयोजित एशिया कप के अंतर्गत बंगलादेश के खिलाफ अपना 100वां.शतक पूरा किया। खेल अर्थात क्रिकेट इतिहास में ऐसी सफलता प्राप्त करने वाले सचिन अब तक के एकमात्र खिलाड़ी है। 2010 में इंडियन प्रीमीयर लीग (IPL) मैचों में मुम्बई इंड़ियनस इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुची जहां सचिन ने टूर्नामेंट की 14 इंनिंग्स में 618 रन बनाते हुए शॉन मार्स का आईपीएल मैचों में रिकॉर्ड भी तोड़ा। इनके अच्छे प्रदर्शन से इन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट घोषित किया गया साथ ही आईपीएल 2010 मे सचिन को बेस्ट बैटमैन और बेस्ट कप्तान का पुरस्कार भी दिया गया। अप्रैल 2012 मे सचिन तेंदुलकर को राष्ट्रपति के द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया।

खेल जीवन की उपलब्धियां


• 1988-89 में सचिन ने रणजी ट्रॉफी में मुम्बई की तरफ से खेला और शतक बनाया। वे मुम्बई की तरफ से खेलने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे। अगले साल वह ईरानी ट्राफी में शामिल हुए और 103 रन बनाएं। उसके बाद दलीप ट्राफी में शामिल होने पर पश्चिमी जोन और पूर्वी जोन के विरुद्ध 151 रन बनाएं। इस प्रकार तीनों देशीय टूर्नामेंट में प्रथम बार भाग लेने पर शतक लगाने वाले प्रथम भारतीय खिलाड़ी बन गए।
• सचिन और विनोद कांबली ने मिलकर सेंट जेवियर के विरूद्ध शारदाश्रम के लिए 664 रन बनाए। यह किसी भी क्रिकेट खेल के लिए विश्व रिकॉर्ड है। इसमें सचिन ने 326 नाट आउट का स्कोर बनाया। फिर बॉम्बे क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से उन्हें वर्ष का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया।
• 1991 में 18 साल की आयु में सचिन यार्कशायर का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रथम बाहरी खिलाड़ी बने। उस वर्ष उन्हें वर्ष का क्रिकेटर चुना गया।
• 1992 मे वे पहले खिलाड़ी बने जिसे तीसरे अम्पायर द्वारा द्वारा आउट करार दिया गया।
• सचिन ने अपने खेल की शुरुआत से लगातार हर टेस्ट मैच खेला और लगातार 84 टेस्ट खेले।
• सचिन 29 वर्ष 134 दिन की आयु में 100 वां टेस्ट मैच खेलने वाले सबसे कम आयु के खिलाड़ी बने।
• सचिन का पहला टेस्ट 1989 में कराची में हुआ जो कपिल देव का 100वां टेस्ट मैच था।
• जिन खिलाड़ियो ने 150 या अधिक टेस्ट मैच खेले है, उनमें सचिन का औसत सर्वाधिक 55.70 है।
• 1992 में 19 साल की आयु में टेस्ट मैच में एक हजार रन बनाने वाले सचिन विश्व के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी है।
• 20 साल की आयु से पूर्व टेस्ट मैच में पांच शतक बनाने वाले सचिन प्रथम व एकमात्र खिलाड़ी है।
• सचिन ने अपना पहला टेस्ट शतक इंग्लैंड के विरुद्ध बनाया। तब उन्होंने 119 रन बनाएं और नॉट आउट रहे। सचिन तेंदुलकर संसार के चौथे नम्बर के खिलाड़ी है, जिन्होंने सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश किया।
• अक्टूबर 2009 में तेंदुलकर तीस हजार रन बनाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतने रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए।
• जुलाई 2002 में विजडन लंदन द्वारा सचिन को पीपुल्स च्वाइस अवार्ड दिया गया।
• 10 दिसंबर 2005 को सचिन ने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 34 शतक बनाने का सुनील गावस्कर का रिकॉर्ड तोड दिया और अपना 35वां शतक श्रीलंका के खिलाफ बनाया। इस टेस्ट मैच में तेंदुलकर ने गावसकर के 125 टेस्ट खेलने के रिकॉर्ड की भी बराबरी की।
• सचिन दुनिया के सफलतम बल्लेबाज है। 2010 के प्रारंभ तक सचिन 46 शतकों के साथ वनडे में सर्वाधिक 17594 बनाने वाला खिलाड़ी बन गए थे।
• मार्च 2010 तक सचिन 93 अर्द्धशतक बनाकर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक अर्द्धशतक बना चुके थे। सचिन ने 442 मैचो में 93 अर्द्धशतक लगाएं।
• सचिन सौ शतक लगाकर विश्व रिकॉर्ड बना चुके है।
• 60 बार वह मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार जीत चुके है। यह एक रिकॉर्ड है।
• टेस्ट मैच में दस हजार रन बनाने वाले सचिन सबसे युवा खिलाड़ी रहे है।
• विज्ञापनों की दुनियां का उन्हें बादशाह कहा जाता है। सारे रिकॉर्ड तोडते हुए 2006 में उन्होंने आइकोनिक से 6 साल के लिए 180 करोड़ का अनुबंध किया। इससे पूर्व उन्होंने वर्ल्ड टेल के साथ 5 साल का 100 करोड़ का अनुबंध किया था।
• 16 नवंबर 2013 तक संन्यास के समय सचिन टेस्ट मैचों में 15921 रन और वनडे मैचों में 18426 रन बना चुके थे।

खेल जीवन के सम्मान


1. अर्जुन पुरस्कार – 1994 में।
2. राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार – 1997 में।
3. विजडन द्वारा क्रिकेट ऑफ द ईयर — 1997 में।
4. पद्मश्री पुरस्कार — 1999 में।
5. महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार — 2001 में।
6. प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट क्रिकेट वर्ल्डकप — 2003 में।
7. राजीव गांधी पुरस्कार — 2005 में।
8. पद्म विभूषण पुरस्कार — 2008 में।
9. आउट स्टैंडिंग पुरस्कार एशियन अवार्ड इन लंदन — 2010 में।
10. एल.पी. पीपुल्स पुरस्कार — 2010 मे।
11. सर्वश्रेष्ठ इंडियन एयरफोर्स सम्मान — 2010 में।
12. कैस्ट्रोल इंडियन क्रिकेटर ऑफ द ईयर पुरस्कार — 2011 में।
13. बी.सी.सी.आई क्रिकेटर ऑफ द ईयर पुरस्कार — 2011 में।
14. विजडन इंडियन आउटस्टैंडिंग एचीवमेंट पुरस्कार — 2012 में।
15. भारत रत्न पुरस्कार — 2013 में।

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