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मेघालय का इतिहास, खाना, पहनावा, त्यौहार, सांस्कृति, और 10 प्रमुख डिश

भारत देश के उत्तर पूर्वी भाग में एक पहाडी पटटी है। यह पहाडी पट्टी पूर्व से पश्चिम तक लगभग 300 किलोमीटर लंबी और लगभग 100 किलोमीटर चौडी है। इस पहाडी पटटी का कुल क्षेत्रफल 22429 वर्ग किलोमीटर है। यह पहाडी पट्टी खुबसूरत प्राकृति संपदा, मनमोहित झरनो, कलकल करती नदियो, खनिज, गांवो और शहरो से सजी है। इस पहाडी पटटी के पूरे क्षेत्रफल को मिलाकर उत्तर पूर्वी भारत का एक खुबसूरत राज्य (मेघालय) बनता है। अपनेे इस लेख में हम भारत के इसी खूबसूरत राज्य मेघालय की सैर करेगें। और इस राज्य की इन प्रमुख जानकारियो के बारे में जानेंगें— मेघालय का इतिहास, मेघालय के पर्यटन स्थल, मेघालय का खाना, मेघालय का पहनावा, मेघालय की संस्कृति, मेघालय की जन जातियां, मेघालय के त्यौहार, मेघालय की 10 प्रमुख डिश आदि के बारे में विस्तार से जानेंगें।

 

मेघालय का अर्थ

जितना खूबसुरत यह राज्य है, उतना ही खूबसूरत इस राज्य का नाम है। मेघालय संस्कृत भाषा के दो शब्दो को मिलाकर बना है। मेघ+आलय=मेघालय । संस्कृत भाषा के इन दोनो शब्दो का अर्थ निकाला जाये तो “मेघ” का अर्थ होता है “बादल”। और “आलय” का अर्थ होता है “निवास” यानि “घर”। तो इस तरह मेघालय का अर्थ होता है “बादलो का निवास” या फिर “बादलो का घर” भी कहा जा सकता है।

 

मेघालय का इतिहास और सुंदर दृश्य
मेघालय के सुंदर दृश्य

 

मेघालय का इतिहास

मेघालय का इतिहास यहा निवास करने वाली तीन प्रमुख जनजातियो खासी, जयंतिया, और गारो से जुडा है। ये जनजातिया यहा सदियो पहले से निवास करती आयी है। किदवंतियो के अनुसार खासी राज्य के सबसे शुरूआती आप्रवासीयो में से थे। खासी, जयंती, गारो इन जनजातियो का अपना अपना क्षेत्र था। सन् 1765 के आस पास असम के इस क्षेत्र पर अंग्रेजो का अधिकार हुआ था। आजादी के बाद सन् 1954 में इस क्षेत्र के निवासियो ने एक अलग पृथक राज्य की मांग उठाई जिसे राज्य पुनर्गठन आयोग ने अस्वीकृत कर दिया था। सन् 1960 में इस मांग को शांतिपूर्ण तरीको से मनवाने के उद्देश्य से “आल पार्टी हिल लीडर्स” का गठन किया गया। इन आंदोलनो के चलते सितंबर 1968 में भारत सरकार ने मेघालय को असम राज्य के अंदर रहते हुए स्वायतशासी राज्य का दर्जा दे दिया। बाद में 21 जनवरी 1972 को एक अलग राज्य के रूप में मेघालय की स्थापना हो गई।

 

 

मेघालय के बारे में

मेघालय का इतिहास जानने के बाद अब कुछ इस राज्य के बारे में भी जान लेते है। मेघालय की राजधानी शिलांग है। मेघालय में कुल 11 जिले है जिनके नाम इस प्रकार है–

पूर्व गारो हिल्स, (विल्लियम नगर)

पश्चिम गारो हिल्स (तुरा)

उत्तर गारो हिल्स (रेसुबेलपारा)

दक्षिण गारो हिल्स (बाघमारा)

दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स (अम्पति)

पूर्व जयंतिया हिल्स (खालिएहरिअत)

पश्चिम जयंतिया  (जौवाई)

पूर्वी खासी हिल्स (शिलांग)

दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स (मौकीरवत)

पश्चिम खासी हिल्स (नोंगस्टोइन)

री भोई (नोगपोह)

नोट:- ब्रेकिट में जिला मुख्यालय का नाम दिया गया है।

मेघालय में विधान सभा की 60 सीटे तथा लोकसभा की 2 सीटे तथा राज्यसभा की एक सीट है। सन् 2001 की जनगणना में मेघालय की जनसंख्या 2306069 थी जो सन् 2011 की जनगणना में बढकर 2966889 हो गई थी। मेघालय में खासी, गारो, अंग्रेजी भाषाएं मुख्य रूप से बोली जाती है।

 

 

मेघालय की जन जातियां

मेघालय का इतिहास यहा के जनजातियो से जुडा है। मेघालय का इतिहास और मेघालय के बारे में जानने के बाद आइए आगे के अपने इस लेख में मेघालय की प्रमुख जनजातियो के बारे में जानते है।

खासी

खासी मेघालय में रहने वाली एक प्राचीन जनजाति है। इस जनजाति की ऊक छोटी आबादी बंगलादेश में भी रहती है। खासी का अर्थ “सात झोपडियां है” है। इस जनजाति के लोग खासी भाषा बैलते है। 2001 की जनगणा के अनुसार अनुसार 11 लाख से अधिक खासी जनजाति के मेघालय में रहते थे। खासी जनजाति के लोग पान के पत्ते, सुपारी और संतरे की खेती करते है। यह बांस और बेंत के उत्पाद बनाने में भी कुशल होते है। भारत के कई राज्यो में खासी को अनूसूचित जनजाति का दर्जा भी दिया गया है। खासी जनजाति के पुरूष लोगो का पारंपरिक परिधान जेयफोंग और महिलाओ का पारंपरिक परिधान जैनसेम है।

 

गारो

गारो मेघालय और बंगलादेश के आसपास के क्षेत्रों की एक जनजाति है। यह मेघालय की दूसरी सबसे बडी जनजाति है। यह जनजाति मुख्य रूप से ईसाई है। यह लोग जनजाति के कल्याण के लिए कई देवी देवताओ के सम्मुख जानवरो की बली देकर भी प्राथना करते है। यह जनजाति मेघालय के साथ साथ उत्तर पूर्वी कई राज्यो में भी निवास करती है। 2001 की भारती जनगणना के अनुसार मेघालय में इनकी जनसंख्या दो लाख के लगभग थी। इनकी भाषा गारो है। जो तिब्बती और बर्मन भाषा से मेल खाती है। वांगला, गलमेकदआ, अगलमका और क्रिसमस इनके मुख्य त्यौहारो में से है।

 

हाजोंग

हाजोंग एक आदिवासी जातिय समूह है। और मेघालय में चौथे बहुमत की जनजाति है। यह जातिय समूह पूर्वोत्तर भारत के साथ साथ बंगलादेश में भी फैला हुआ है। दोनो देशो को मिलाकर इस जातिय समूह की अनुमानित जनसंख्या ढेड लाख के लगभग है। इनकी भाषा हाजोंग है। जो एक पूर्वी ईंडो आर्यन भाषा है। पाथिंग और फूलाअगोंन हाजोंग जातीय समूह की महिलाओ का पारंपरिक परिधान है। दुर्गा पुजा, नोनतांग, चोरमगा इनके प्रमुख त्यौहार है।

 

पनार या जयंतिया

पनार मेघालय की जनजाति है जिसे जयंतिया के नाम से भी जाना जाता है। जयंतिया शब्द एक पूर्व सम्राज्य जयंतिया सम्राज्य से लिया गया है। जिसके शासक सिंटेंग समुदाय के थे। 1835 में जयंतिया सम्राज्य पर ब्रिटिशो द्वारा कब्जा कर लिया गया था। आजादी के बाद 1972 में जयंतिया सम्राज्य जयंतिया हिल्स जिले के रूप में स्थापित किया गया। जयंतिया का मूल आदिवासी धर्म निमेद्रे के नाम से जाना जाता है।

 

तीवा

तीवा जनजाति असम और मेघालय में रहने वाली जनजाति है। असम राज्य के भीतर तीवा एक अनूसूचित जनजाति के रूप में पहचाने जाते है। यह जनजाति दो समूहो पहाडी तीवा और मैदानी तीवा में विभाजित है। पहाडी तीवा लोग मेघालय के री भोई जिले के उत्तरी कोने में रहते है। दूसरा समूह मैदानी क्षेत्रो में रहता है। 2001 की जनगणना के अनुसार पौने दो लाख के लगभग इनकी जनसंख्या है।

 

 

मेघालय की बांस व लकडी कला से बने सुदर आइटम मेघालय का इतिहास
मेघालय की बांस व लकडी कला से बने सुदर आइटम

 

प्रिय पाठको अब तक के अपने इस लेख में हमने मेघालय का इतिहास, मेघालय की जन जातियां, संस्कृति और मेघालय के बारे में काफी कुछ जाना। आगे के अपने इस लेख में हम मेघालय का खाना और मेघालय की 10 प्रमुख डिशो व्यंजनो के बारे में जानेगें।

 

मेघालय का खाना

मेघालय की इन जानजातियो का अपना अपना अगल स्वाद है। इनके व्यंजन भी अपने अगल ही है। एक बात इन सब में कॉमन है कि यह लोग मांसाहारी व्यंजनो के अधिकतर शौकिन होते है। सुअर, गाय, चिकन, मछली का मीट यहा के व्यंजनो में प्रमुखता के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा यह लोग मोसमी हरी सब्जियो, हरे बांस व स्थानिय जडी बूटियो का भी खूब इस्तेमाल करते है। इसके अलावा यहा के लोग खाने में रोटी की जगह चावल को ज्यादा महत्व देते है। आइए आगे के अपने इस लेख में मेघालय की 10 प्रमुख डिशो के बारे में जान लेते है।

 

मेघालय की 10 प्रमुख डिश

 

जाडो

मेघालय के खासी समुदाय में जाडो बहुत लोकप्रिय पकवान है। यह पकवान मुख्य रूप से अपने रंग औ स्वाद के कारण उत्तर भारत का भी एक प्रसिद्ध पकवान है। जाधो मूल रूप से चावल और मीट से निर्मित पकवान है। जिसका रंग पिला व लाल होता है। यह अधिकतर सूअर और गाय के मिट के साथ बनाया जाता है। कुछ लोग इसे चिकन और मछली के साथ भी बनाते है। इसे बनाने के लिए प्याज, अदरक, हल्दी, हरी मिर्च आदि का मिश्रण तैयार किया जाता है। जिसको मांस और चावल के साथ मिलाकर पकाया जाता है। कुछ लोग इसे सूअर के रक्त में भी बनाते है। उनका मानना है कि सूअर के रक्त में पकाने से यह साहस प्रदान करता है।

 

डोह खलीह

डोह खलीह एक स्वादिष्ट व पौष्टिक पकवान है। यह एक सुगंधित सलाद की तरह होता है। जिसमे इच्छानुसार सुअर, गाय, चिकन, मछली के मीट के बारीक बारीक टूकडे (कीमा) करके प्याज, हरी मिर्च के साथ बनाया जाता है। कुछ लोग इसमे गाजर, गोभी, बांस की कोपल आदि मौसमी सब्जियो का भी इस्तेमाल करते है। यह डिश रोटी और चावल के साथ यहा के लोगो की पसंदीदा डिश है। खासी समुदाय के यह मुख्य पकवानो में से एक है।

 

डोह नियांग

यह पकवान बहुत स्वादिष्ट होता है। ऊंचे पकवानो की श्रेणी में आता है। यह पकवान सूअर या गाय के मीट द्वारा गाढी ग्रेवी के साथ तैयार किया जाता है। इसकी ग्रेवी बनाने के लिए हरी मिर्च, प्याज, लहुसन, अदरक, और काले तील का प्रयोग किया जाता है। यह पकवान बिल्कुल दिल्ली के चिकन काली मिर्च की तरह होता है। इसका स्वाद भी बेमिशाल होता है। खासी समुदाय के मुख्य व्यंजनो में से एक है।

 

 

मेघालय का इतिहास और व्यंजन
मेघालय के व्यंजनो के चित्र

 

नाखम बोरिंग बेलती चटनी

यह डिश गारो समुदाय के लोगो की सबसे पसंदीदि डिश है। यह सूखी मछली से तैयार की जाती है। जिसमे टमाटर को भूनकर (बैंगन के भर्ते की तरह) उसका छिलका उतारकर सूखी मछली, लहुसन के साथ उसका भर्ता बनाया जाता है। इस तरह यह एक स्वादिष्ट डिश बनकर तैयार होती है। जिसको चावल के साथ परोसा जाता है।

 

नाखम बीची

यह एक ड्राई फिश सूप है। जिसको यहा के लोग खाने से पहले सर्व करते है। यह सूखी मछली द्वारा तैयार किया जाता है। मछलियो को धूप या आग द्वारा सूखाया जाता है। फिर मछली को पानी में उबालकर अनय साम्रगी के साथ इसका सूप बनाया जाता है। यह यहा के लोगो की पसंदीदा डिश है।

 

गालडा नाखम

यह डिश सूखी मछली व मौसमी सब्जियो को मिलाकर तैयार की जाती है। इसका स्वाद काफी जायकेदार होता है। रोटी और चावल दोनो के साथ इसे परोसा जाता है। यह गारो समुदाय की मुख्य डिशो में से भी एक है।

 

खापा

यह भी एक मांसाहारी डिश है। जो चिकन के मीट से तैयार की जाती है। इसका स्वाद भी लाजवाब होता है। यहा के लोग इसे सादे चावल के साथ परोसते है। यह डिश गारो समुदाय के व्यंजनो में से एक है।

 

वाक जो करपा

यह डिश सूअर और गाय के मीट को टमाटर के साथ फ्राई करके बनाई जाती है। इसमे मीट को टमाटर, हरी मिर्च, प्याज आदि के मिश्रण में फ्राई किया जाता है। इसको चावल, रोटी, दोनो के साथ परोसा जाता है।

 

टंगरीमबाई

यह एक शाकाहारी डिश है। जो सोयाबीन द्वारा तैयार की जाती है। यह खासी समुदाय का आम भोजन है। जो खासो हिल्स में हर जगह आसानी से मिल जाता है।

 

कयात

यह एक पार्टी ड्रिंकस है। इसको चावल द्वारा तैयार किया जाता है। जिसमे कुछ फ्लेवर भी मिक्स किया जाता है। इसे मेघालय की बियर के रूप में जाना जाता है।

 

मिनिल सोंगा

यह गारो समुदाय की फैमस डिश है। यह हरे बांस और चावल से तैयार कि जाती है। इसे बनाने की विधी भी बहुत अनोखी है। इसमे चावल को हरे बांस के बम्बू में भरकर बनाया जाता है। जिसको स्पाईसी चटनी के साथ परोसा जाता है।

 

मेघालय का इतिहास, मेघालय का खाना, मेघालय की 10 प्रमुख डिश के बारे में हमने अब तक अपने इस लेख में जाना। आगे के अपने इस लेख में हम मेघालय के त्यौहार, उत्सव, समारोह, और नृत्य के बारे में जानेगें। जिनके बिना मेघालय का इतिहास अधूरा है।

 

मेघालय के त्यौहार उत्सव व समारोह

 

शाद सुक मन्सेम

शाद सुक मन्सेम मेघालय की खासी जनजाति का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह हर साल अप्रैल के महीने में पडता है। जिसका भव्य समारोह शिलांग में आयोजित किया जाता है। जिसमे भाग लेने के लिए दूर दूर से खासी समुदाय के लोग एकत्र होते है। यह फेस्टिवल मुख्य रूप से एक डांस फेस्टिवल है। जो काफी मनोरंजक हो उत्साह लाला होता है। यह फेस्टिवल तीन दिन तक चलता है। इसमे गोरो और जयंतिया लोग भी हिस्सा लेते है। पहले इसे शाद फॉर के नाम से जाना जाता था। यह त्यौहार पुरानी फसल की कटाई और नई फसल की रोपाई के उलक्ष्य में खुशी के रूप में मनाया जाता है। इस त्यौहार में महिला और पुरूष दोनो हिस्सा लेते है। इस त्यौहार के नृत्य के नियम के अनुसार इसमे अविविहित लडकिया ही इस नृत्य में भाग ले सकती है। जबकि पुरूषो के लिए यह नियम लागू नही होता है।

 

वंगाला

वंगाला त्यौहार एक नृत्य उत्सव है। यह त्यौहार सौ ड्रम के नृत्य के रूप में जाना जाता है। यह गारो समुदाय के लोगो का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह उत्सव अक्सर नवंबर के महिने में पडता है। इस त्यौहार का उत्सव एक सप्ताह तक चलता है। यह त्यौहार काम की अवधि की समाप्ति का सूचक और अच्छी फसल के संकेत के उपलक्ष्य के रूप में मनाया जाता है। इस उत्सव नृत्य में इस्तेमाल किए जाने वाले सौ बेलनकार ड्रम की थाम पर थिरकते कलाकार मनोरंजक और सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते है।

 

नोंगखिलम

यह त्यौहार खासी समुदाय द्वारा पांच दिनो के लिए मनाया जाता है। यह त्यौहार अच्छी फसल पर भगवान को धन्यवाद देने के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार हर साल अक्टूबर या नवंबर के महिनो में आता है।

 

बेहडेंखिलम

यह जयंतिया समुदाय के लोगो का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार बुवाई की अवधि के बाद जुलाई के महिने में मनाया जाता है। जिसमे बुरी आत्मा बिमारी आदि से समुदाय की रक्षा के लिए भगवान से प्राथना करते है। तथा इस त्यौहार में पूर्वजो को भोजन देने के रूप में जानवरो की बलि चढाई जाती है।

 

लाहू

यह जयंतिया समुदाय के लोगो का एक त्यौहार है। इस उत्सव में महिला और पुरूष अपने पारंपरिक वेषभूषा में हिस्सा लेते है। यह उत्सव यहा के लोगो द्वारा मनोरंजन के लिए नृत्य के रूप में मनाया जाता है। लाहू नृत्य में आमतौर पर एक महिला के दोनो तरफ दो पुरूष होते है।

इसके अलावा मेघालय में राष्ट्रीय स्तर के त्यौहार क्रिसमस, दुर्गा पुजा, दिपावली, आदि भी मनाए जाते है।

यदि आप मेघालय का इतिहास के साथ पर्यटन स्थलो के बारे में जानना चाहते है तो आप हमारी यह पोस्ट पढे–

मेघालय के पर्यटन स्थल

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नागालैंड का इतिहास

त्रिपुरा का इतिहास

मिजोरम का इतिहास

अंडमान निकोबार द्विप समूह

 

 

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