Alvitrips

Touris place, religious place, history, and biography information in hindi
गौतमेश्वर महादेव मंदिर अरनोद राजस्थान – गौतमेश्वर मंदिर का इतिहास

गौतमेश्वर महादेव मंदिर अरनोद राजस्थान – गौतमेश्वर मंदिर का इतिहास

राजस्थान राज्य के दक्षिणी भूखंड में आरावली पर्वतमालाओं के बीच प्रतापगढ़ जिले की अरनोद तहसील से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर प्रकृति की गोद में रमणीय स्थल पर गौतमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इस मंदिर में मीणा जाति के इष्टदेव और शौर्य के प्रतीक गौतमेश्वर महादेव की प्रतिमा स्थापित है। इस गौतमेश्वर मंदिर में शिल्पकला का अद्भुत नमूना तो देखने को नहीं मिलता है, फिर भी सौंदर्य और प्राकृतिक छटा की दृष्टि से यह बहुत विख्यात है। वर्ष मे एक बार यहां गौतमेश्वर का मेला भी लगता है। जो काफी प्रसिद्ध है।

गौतमेश्वर धाम का इतिहास – हिस्ट्री ऑफ अरनोद गौतमेश्वर मंदिर


सूकडी नदी जिसे सब लोग पतित पावनी गंगा भी कहते है। के दाहिने किनारे की एक पहाडी पर परकोटे से घिरा यह मंदिर स्थित है। जिसे सर्व प्रथम एक गूजर ने अपूर्ण बनाकर छोड़ दिया था। उसके बाद मीणा जाति के लोगों ने गौतमेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण करवाया व मंदिर का प्रतिष्ठा महोत्सव भी सम्पन्न किया था। चारों ओर से विशाल परकोटे से घिरे इस गौतमेश्वर तीर्थ स्थल में विभिन्न देवताओं की प्रतिमाएं विद्यमान है। गौतमेश्वर के मुख्य मंदिर के श्वेत शिखरों की झांकी यात्रियों को दूर से ही दिखाई दे जाती है। इस गौतमेश्वर धाम का परकोटा दूर से एक छोटा सा किला प्रतीत होता है। मंदिर में साधु संतों व यात्रियों के बैठने को एक बडी गैलरी, भोजनशाला, और मोदीखाना है।

गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य
गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य

मंदिर का प्रवेशद्वार उत्तर दिशा में है, और अन्दर प्रवेश करते ही दाहिनी ओर श्री गौतमेश्वर महादेव का लिंगाकार है। उनके पीठ पीछे बाई ओर गजानंद व अहेलिया, तथा दाहिनी ओर अंजली, और सामने नंदेश्वर की प्रतिमाएं स्थापित है। मंदिर के बाहर पीछे दाहिनी तरफ गौतम ऋषि और बाई ओर अंबिकाली माता के छोटे छोटे मंदिर है। मुख्य मंदिर के सम्मुख हनुमानजी, गंगेश्वर, गजानंद, धर्मराज, शनेश्वर भगवान आदि की प्रतिमाएं विराजमान है।


गौतमेश्वर तीर्थ की प्राचीनता के प्रमाण तो अभी तक प्राप्त नहीं हो सके है। लेकिन लोगों का ऐसा अनुमान है कि यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। वैसे श्री लल्लू भाई देसाई द्वारा लिखित “चौहान कुल कल्पद्रुम” के प्रथम भाग में विक्रमी सन् 1932 के पूर्व में भी यहां मंदिर मौजूद बताया है। गौतमेश्वर तीर्थ स्थान के संबंध अभी तक लिखित प्रमाण के अभाव में यह ज्ञात नहीं हो सका है कि मंदिर किसने बनवाया? क्यों बनवाया? व इसका नाम गौतमेश्वर क्यों रखा गया? । इस तीर्थ स्थल से तीन चार पौराणिक दंतकथाएं जुडी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि श्री गौतम ऋषि ने इन पर्वतमालाओं में तपस्या की थी। हांलाकि गौतम ऋषि की यहां कोई प्रतिमा नहीं है। लेकिन अहेलिया व अंजली की प्रतिमाओं का होना व मंदिर को गौतम ऋषि जी का मंदिर नाम से संम्बोधित करना यह प्रकट करता है कि इस स्थान से श्री गौतम ऋषि का संबंध रहा है।


एक अन्य दंतकथा के अनुसार गोंगमुआ नामक एक मीणा जाति का चरवाहा, एक गूजर के मवेशी चराया करता था। और जब वह मवेशियों को लेकर अरावली पर्वतमालाओं मे घुसता था तो उसके मवेशीयो के साथ एक अनजान गाय हमेशा साथ हो जाया करती थी। और शाम को वापस हो जाया करती थी। बहुत समय तक ऐसा ही चलता रहा गाय उसके मवेशियो के साथ हो जाती और दिनभर चर कर वापस अपने स्थान को चली जाती। एक उस गाय ने एक बछडे को जन्म दिया। गोंगमुआ उस बछडे को लेकर गाय के पिछे पिछे चल दिया। गाय जाकर एक टेकडी की गुफा के पास जाकर रूक जाती है। वर्त्तमान मे यह गुफा गौतमेश्वर गुफा के नाम से प्रसिद्ध है। उस गुफा में एक ऋषि और दो महिलाएं निवास करती थी। गोंगमुआ उनसे अपनी सालभर की गाय चराई मांगता है। ऋषि ने उसकी झोली में कुछ जौ के दाने गौ चराई में दिए। गोंगमुआ न जाने क्यों उन्हें वहीं डालकर चला गया। ऋषि उसके भोलेपन को देखकर मुस्कराएं। गोंगमुआ जब घर पहुंचा तो उसकी पत्नी की दृष्टि उसके कपडों पर चमकती हुई वस्तु पर पड़ी। (जौ का कोई दाना उसके कपडों से चिपका रह गया था)। और पुछा यह क्या वस्तु है। गोंगमुआ ने जब सारा वृत्तांत सुनाया तो उसकी पत्नी ने कहा कि वह ऋषि नहीं ईश्वर का रूप है। गोंगमुआ वापस पहुंचता है और ऋषि के चरण स्पर्श कर कहता है। कि मै आब अपने आपको आपकी सेवा में प्रस्तुत करता हूँ। और वह तपचर्या में लग जाता हैं। ऋषि उसकी तपश्चर्या से प्रसन्न होकर पूछते है। कि गोंगमुआ तुम क्या चाहते हो। वह अपनी इच्छा प्रकट करते हुए कहता है। कि एक तो मेरा नाम रोशन हो और दूसरे प्रति वर्ष मेरी जाति के लोग यहाँ पर एकत्रित हो। ऋषि ने कहा ऐसा ही होगा।

गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य
गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य

उसके पश्चात यहां प्रतिवर्ष मेला भरने लगा। जिसको लोग गोंगमुआ का मेला कहते थे। गौतम ऋषि का मेला और बाद मे गौतमेश्वर का मेला नाम से पुकारा जाने लगा। इसी दौरान गोंगमुआ की भक्ति से प्रभावित होकर एक गूजर ने यहां एक मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जिसको वह सम्पूर्ण नहीं करा सका। उसके बाद मीणा जाति के लोगों ने इस मंदिर का कार्य पूर्ण करवाकर इसकी व्यवस्था का कार्यभार अपने ऊपर लिया। यह मेला वैशाख माह की मकर सक्रांति के 90 दिन बाद 13 अप्रैल से 15 मई 30 दिन तक चलता है। भयंकर अकाल के समय कुओं का पानी सूख जाता है। पर यह उल्लेखनीय है कि मेले के शुरू होने के समय से गौतमेश्वर मंदिर की सीढियों के पास गंगा कुंड नामक स्थान से प्राकृतिक रूप से पानी फव्वारे की भांति आता है। वर्तमान में यहां पक्का कुंड बना है। दावा किया जाता है कि इस कुंड में स्नान करने तथा गौतमेश्वर के दर्शन करने से मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है। वर्तमान पापों से मुक्त होने का सर्टिफिकेट भी मंदिर कार्यालय से दिया जाता है। इसके अलावा मेले के समय इस क्षेत्र के दो तीन किलोमीटर के क्षेत्र थोडी खुदाई करने पर ही अपार मीठा जल प्राप्त हो जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि मेले के अतिरिक्त समय में ऐसा कभी नहीं होता है। यहां आने वाले यात्रियों का ही यह विश्वास नहीं है बल्कि यह एक वास्तविकता है।



मेले मे मीणा लोग अपनी पारंपरिक पौशाक सिर पर लाल साफा, जिसका एक पल्ला कानों तक लटकता हुआ, कमीज की जेब में रेशमी रूमाल, कानों मे झेलें, हाथ में फूंदकीदार छाता, एक पैर मे चांदी का कड़ा आदि पहने हुए बडे सज धज के मेले में आते है। और एक दूसरे के गले मे हाथ डालकर गौतमेश्वर महादेव के गीत गाते है।

गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य
गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य


मेला शुरू होने से दस दिन पूर्व से मीणा लोग शराब, मांस का सेवन बंद कर देते है। और मेले में किसी भी व्यक्ति को शराब पीकर घूमने नहीं देते। यदि कोई ऐसा कर भी लेता है तो उसे तत्काल मेले से दूर लेजाकर छोड़ दिया जाता है। साथ ही इस क्षेत्र में जुआ खेलना भी वर्जित है। मंदिर के बाहर एक कक्ष बना हुआ है। जहाँ पर मीणों की पंचायत लगती है। जिसका फैसला सर्वमान्य होता है। तथा इसी मेले के अवसर पर मीणा तथा अन्य जाति के लोग अपने अपने पूर्खो की अस्थियां सूकडी नदी में विसर्जित करते है। मीणा जाति के लोग गौतमेश्वर महादेव को अपना कुलदेवता मानते है। और उन्हें प्यार से भूरिया बाबा, गौतम बाबा, गौरेश्वर बाबा आदि नामों से संम्बोधित करते है।

प्रिय पाठकों आपको हमारा यह लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताए। यह जानकारी आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते है।

प्रिय पाठकों यदि आपके आसपास कोई ऐसा धार्मिक, ऐतिहासिक या पर्यटन महत्व का स्थल है जिसके बारें में आप पर्यटकों को बताना चाहते है। तो आप उस स्थल के बारें में सटीक जानकारी हमारे submit a post संस्करण में जाकर लिख सकते है। हम आपके द्वारा लिखे गए लेख को आपकी पहचान के साथ अपने इस प्लेटफार्म पर जरूर शामिल करेंगे।

राजस्थान पर्यटन पर आधारित हमारे यह लेख भी जरूर पढ़ें:—

पश्चिमी राजस्थान जहाँ रेगिस्तान की खान है तो शेष राजस्थान विशेष कर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान की छटा अलग और
जोधपुर का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे मन में वहाँ की एतिहासिक इमारतों वैभवशाली महलों पुराने घरों और प्राचीन
भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद्ध शहर अजमेर को कौन नहीं जानता । यह प्रसिद्ध शहर अरावली पर्वत श्रेणी की
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने हेदराबाद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल व स्मारक के बारे में विस्तार से जाना और
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने जयपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हवा महल की सैर की थी और उसके बारे
प्रिय पाठको जैसा कि आप सभी जानते है। कि हम भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद् शहर व गुलाबी नगरी
प्रिय पाठको जैसा कि आप सब जानते है। कि हम भारत के राज्य राजस्थान कीं सैंर पर है । और
पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार
जैसलमेर के दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
जैसलमेर भारत के राजस्थान राज्य का एक खुबसूरत और ऐतिहासिक नगर है। जैसलमेर के दर्शनीय स्थल पर्यटको में काफी प्रसिद्ध
अजमेर का इतिहास
अजमेर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्राचीन शहर है। अजमेर का इतिहास और उसके हर तारिखी दौर में इस
अलवर के पर्यटन स्थल के सुंदर दृश्य
अलवर राजस्थान राज्य का एक खुबसूरत शहर है। जितना खुबसूरत यह शहर है उतने ही दिलचस्प अलवर के पर्यटन स्थल
उदयपुर दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
उदयपुर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर है। उदयपुर की गिनती भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलो में भी
नाथद्वारा दर्शन धाम के सुंदर दृश्य
वैष्णव धर्म के वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों, मैं नाथद्वारा धाम का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। नाथद्वारा दर्शन
कोटा दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
चंबल नदी के तट पर स्थित, कोटा राजस्थान, भारत का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। रेगिस्तान, महलों और उद्यानों के
कुम्भलगढ़ का इतिहास
राजा राणा कुम्भा के शासन के तहत, मेवाड का राज्य रणथंभौर से ग्वालियर तक फैला था। इस विशाल साम्राज्य में
झुंझुनूं के पर्यटन स्थल के सुंदर दृश्य
झुंझुनूं भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख जिला है। राजस्थान को महलों और भवनो की धरती भी कहा जाता
पुष्कर तीर्थ के सुंदर दृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर जिले मे स्थित पुष्कर एक प्रसिद्ध नगर है। यह नगर यहाँ स्थित प्रसिद्ध पुष्कर
करणी माता मंदिर देशनोक के सुंदर दृश्य
बीकानेर जंक्शन रेलवे स्टेशन से 30 किमी की दूरी पर, करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक शहर
बीकानेर के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
जोधपुर से 245 किमी, अजमेर से 262 किमी, जैसलमेर से 32 9 किमी, जयपुर से 333 किमी, दिल्ली से 435
जयपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भारत की राजधानी दिल्ली से 268 किमी की दूरी पर स्थित जयपुर, जिसे गुलाबी शहर (पिंक सिटी) भी कहा जाता
सीकर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सीकर सबसे बड़ा थिकाना राजपूत राज्य है, जिसे शेखावत राजपूतों द्वारा शासित किया गया था, जो शेखावती में से थे।
भरतपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भरतपुर राजस्थान की यात्रा वहां के ऐतिहासिक, धार्मिक, पर्यटन और मनोरंजन से भरपूर है। पुराने समय से ही भरतपुर का
बाड़मेर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
28,387 वर्ग किमी के क्षेत्र के साथ बाड़मेर राजस्थान के बड़ा और प्रसिद्ध जिलों में से एक है। राज्य के
दौसा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
दौसा राजस्थान राज्य का एक छोटा प्राचीन शहर और जिला है, दौसा का नाम संस्कृत शब्द धौ-सा लिया गया है,
धौलपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
धौलपुर भारतीय राज्य राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है और यह लाल रंग के सैंडस्टोन (धौलपुरी पत्थर) के लिए
भीलवाड़ा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भीलवाड़ा भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख ऐतिहासिक शहर और जिला है। राजस्थान राज्य का क्षेत्र पुराने समय से
पाली के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
पाली राजस्थान राज्य का एक जिला और महत्वपूर्ण शहर है। यह गुमनाम रूप से औद्योगिक शहर के रूप में भी
जालोर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
जोलोर जोधपुर से 140 किलोमीटर और अहमदाबाद से 340 किलोमीटर स्वर्णगिरी पर्वत की तलहटी पर स्थित, राजस्थान राज्य का एक
टोंक राजस्थान के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
टोंक राजस्थान की राजधानी जयपुर से 96 किमी की दूरी पर स्थित एक शांत शहर है। और राजस्थान राज्य का
राजसमंद पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
राजसमंद राजस्थान राज्य का एक शहर, जिला, और जिला मुख्यालय है। राजसमंद शहर और जिले का नाम राजसमंद झील, 17
सिरोही के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सिरोही जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित है। यह उत्तर-पूर्व में जिला पाली, पूर्व में जिला उदयपुर, पश्चिम में
करौली जिले के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
करौली राजस्थान राज्य का छोटा शहर और जिला है, जिसने हाल ही में पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है, अच्छी
सवाई माधोपुर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सवाई माधोपुर राजस्थान का एक छोटा शहर व जिला है, जो विभिन्न स्थलाकृति, महलों, किलों और मंदिरों के लिए जाना
नागौर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
राजस्थान राज्य के जोधपुर और बीकानेर के दो प्रसिद्ध शहरों के बीच स्थित, नागौर एक आकर्षक स्थान है, जो अपने
बूंदी आकर्षक स्थलों के सुंदर दृश्य
बूंदी कोटा से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शानदार शहर और राजस्थान का एक प्रमुख जिला है।
बारां जिले के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
कोटा के खूबसूरत क्षेत्र से अलग बारां राजस्थान के हाडोती प्रांत में और स्थित है। बारां सुरम्य जंगली पहाड़ियों और
झालावाड़ पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
झालावाड़ राजस्थान राज्य का एक प्रसिद्ध शहर और जिला है, जिसे कभी बृजनगर कहा जाता था, झालावाड़ को जीवंत वनस्पतियों
हनुमानगढ़ पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
हनुमानगढ़, दिल्ली से लगभग 400 किमी दूर स्थित है। हनुमानगढ़ एक ऐसा शहर है जो अपने मंदिरों और ऐतिहासिक महत्व
चूरू जिले के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
चूरू थार रेगिस्तान के पास स्थित है, चूरू राजस्थान में एक अर्ध शुष्क जलवायु वाला जिला है। जिले को। द
गोगामेड़ी धाम के सुंदर दृश्य
गोगामेड़ी राजस्थान के लोक देवता गोगाजी चौहान की मान्यता राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल, मध्यप्रदेश, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों
वीर तेजाजी महाराज से संबंधी चित्र
भारत में आज भी लोक देवताओं और लोक तीर्थों का बहुत बड़ा महत्व है। एक बड़ी संख्या में लोग अपने
शील की डूंगरी के सुंदर दृश्य
शीतला माता यह नाम किसी से छिपा नहीं है। आपने भी शीतला माता के मंदिर भिन्न भिन्न शहरों, कस्बों, गावों
सीताबाड़ी के सुंदर दृश्य
सीताबाड़ी, किसी ने सही कहा है कि भारत की धरती के कण कण में देव बसते है ऐसा ही एक
गलियाकोट दरगाह के सुंदर दृश्य
गलियाकोट दरगाह राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सागबाडा तहसील का एक छोटा सा कस्बा है। जो माही नदी के किनारे
श्री महावीरजी धाम राजस्थान के सुंदर दृश्य
यूं तो देश के विभिन्न हिस्सों में जैन धर्मावलंबियों के अनगिनत तीर्थ स्थल है। लेकिन आधुनिक युग के अनुकूल जो
कोलायत धाम के सुंदर दृश्य
प्रिय पाठकों अपने इस लेख में हम उस पवित्र धरती की चर्चा करेगें जिसका महाऋषि कपिलमुनि जी ने न केवल
मुकाम मंदिर राजस्थान के सुंदर दृश्य
मुकाम मंदिर या मुक्ति धाम मुकाम विश्नोई सम्प्रदाय का एक प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थान माना जाता है। इसका कारण
कैला देवी मंदिर फोटो
माँ कैला देवी धाम करौली राजस्थान हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यहा कैला देवी मंदिर के प्रति श्रृद्धालुओं की
ऋषभदेव मंदिर के सुंदर दृश्य
राजस्थान के दक्षिण भाग में उदयपुर से लगभग 64 किलोमीटर दूर उपत्यकाओं से घिरा हुआ तथा कोयल नामक छोटी सी
एकलिंगजी टेम्पल के सुंदर दृश्य
राजस्थान के शिव मंदिरों में एकलिंगजी टेम्पल एक महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय मंदिर है। एकलिंगजी टेम्पल उदयपुर से लगभग 21 किलोमीटर
हर्षनाथ मंदिर के सुंदर दृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के सीकर से दक्षिण पूर्व की ओर लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर हर्ष नामक एक
रामदेवरा धाम के सुंदर दृश्य
राजस्थान की पश्चिमी धरा का पावन धाम रूणिचा धाम अथवा रामदेवरा मंदिर राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक तीर्थ है। यह
नाकोड़ा जी तीर्थ के सुंदर दृश्य
नाकोड़ा जी तीर्थ जोधपुर से बाड़मेर जाने वाले रेल मार्ग के बलोतरा जंक्शन से कोई 10 किलोमीटर पश्चिम में लगभग
केशवरायपाटन मंदिर के सुंदर दृश्य
केशवरायपाटन अनादि निधन सनातन जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर भगवान मुनीसुव्रत नाथ जी के प्रसिद्ध जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र
रानी सती मंदिर झुंझुनूं के सुंदर दृश्य
सती तीर्थो में राजस्थान का झुंझुनूं कस्बा सर्वाधिक विख्यात है। यहां स्थित रानी सती मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां सती
ओसियां के दर्शनीय स्थल
राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले जोधपुर में एक प्राचीन नगर है ओसियां। जोधपुर से ओसियां की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है।
डिग्गी कल्याण जी मंदिर के सुंदर दृश्य
डिग्गी धाम राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर टोंक जिले के मालपुरा नामक स्थान के करीब
रणकपुर जैन मंदिर के सुंदर दृश्य
सभी लोक तीर्थों की अपनी धर्मगाथा होती है। लेकिन साहिस्यिक कर्मगाथा के रूप में रणकपुर सबसे अलग और अद्वितीय है।
लोद्रवा जैन मंदिर के सुंदर दृश्य
भारतीय मरूस्थल भूमि में स्थित राजस्थान का प्रमुख जिले जैसलमेर की प्राचीन राजधानी लोद्रवा अपनी कला, संस्कृति और जैन मंदिर
गलताजी टेम्पल जयपुर के सुंदर दृश्य
नगर के कोलाहल से दूर पहाडियों के आंचल में स्थित प्रकृति के आकर्षक परिवेश से सुसज्जित राजस्थान के जयपुर नगर के
सकराय माता मंदिर के सुंदर दृश्य
राजस्थान के सीकर जिले में सीकर के पास सकराय माता जी का स्थान राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक

1 comment found

  1. arnod vala gautameshwar mandir pratapgarh hai jahan sari jatiyon ki puja sthali hai…..vahi sukdi nadi gautameshwar mandir sirohi me sukdi nadi ke kinare hai ….in dono jagaho ke bich ki duri 200 km se jyada ki hai……

Leave comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *.