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खजुराहो(कामुक कलाकृति का अनूठा संगम) kamuk klakirti khujraho

खजुराहो ( कामुक कलाकृति का अनूठा संगम

भारत के मध्यप्रदेश के झांसी से 175 किलोमीटर दूर छतरपुर जिले में स्थित शहर खजुराहो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है । इस प्रमुख शहर को प्राचीन काल में खजूरपुरा ओर खजूर  वाहिका के नाम से पुकारा जाता था ।यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू धर्म तथा जैन धर्म के मंदिर है । मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व में इन एतिहासिक इमारतों की दीवारों पर तराशी गई कामुक कलाकृति के लिए प्रसिद्ध है ।हिन्दू कला ओर संस्कृति को शिल्पियों ने इस शहर के पत्थरों पर मध्यकाल में उत्कीर्ण किया था । खजुराहो का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना है यह शहर चन्देल सम्राज्य की प्रथम राजधानी था चंदेल वंश ओर खजुराहो के संस्थापक चन्द्रबर्मन थे।देश विदेश से लाखों पर्यटक इस सौंदर्य की प्रतीक कलाकृति को देखने निरंतर आते रहते है। इन मंदिरों को तीन  समूहों में बांटा गया है :- पश्चिमी समूह, पूर्वी समूह, दक्षिणी समूह

पश्चिमी समूह

ब्रिटिश इंजीनियर टी एस वर्ट ने खजुराहो के मंदिरों की खोज की थी तब से मंदिरों के एक विशाल समूह को पश्चिमी समूह के नाम से जाना जाता है । यह खजुराहो के सबसे आकषर्ण स्थानों में से एक है । इस स्थान को यूनेसको ने 1986 में विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है । शिव सागर के नजदीक स्थित इस पश्चिमी समूह के मंदिरों के साथ यात्रा की शुरुआत करनी चाहिए इस समूह में कई आकषर्ण मंदिर है इन मंदिरों की बहुत ज्यादा सजावट की गई है ।

लक्ष्मण मंदिर

यह मंदिर पत्थरों से निर्मित एक अद्भुत संरचना है । यह मंदिर जितना प्राचीन है उतना ही सुरक्षित है । यहाँ लगभग 600 देवी देवताओं की मूर्तियाँ है  । इस मंदिर में सुंदर नक्काशी की गई है

वराह मंदिर

इस मंदिर में भगवान वराह का सबसे बड़ा विशालकाय चित्र स्थापित है । वराह भगवान विष्णु के अवतार है । मंदिर के चारों ओर बाहरी दीवारों पर सुंदर कलाकृति पर्यटकों को बहुत पसंद आती है।

कंदारिया महादेव मंदिर

यह मंदिर पश्चिमी समूह के मंदिरों में सबसे बड़ा मंदिर है । यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है ।इस मंदिर की भव्यता ओर सुंदरता काफी प्रसिद्ध है ।इस मंदिर का निर्माण राजा विध्घाधर ने महमूद गजनी से युद्ध में विजय के उपलक्ष्य में कराया था ।यह मंदिर खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों में से है ।

चौसठ योगिनी

यह मंदिर 64 देवियों को समर्पित है । इस मंदिर का निर्माण लगभग 9 वी शताब्दी में हुआ था यह खजुराहो के प्रसिद्ध पर्यटन आकर्षणो में से एक है ।

विश्वनाथ मंदिर

शिव मंदिरों में अत्यंत महत्वपूर्ण विश्वनाथ मंदिर का निर्माण सन् 1002- 10003 ई°  में हुआ था । पश्चिमी समूह की जगती पर स्थित यह मंदिर अतिसुन्दर मंदिरों में से एक है । इस मंदिर का नामकरण भगवान शिव के एक ओर नाम विश्वनाथ पर किया गया है गर्भगृह में शिवलिंग के साथ साथ गर्भगृह केंद्र में नंदी पर आरोहित शिव प्रतिमा स्थापित की गयी है।

नंदी मंदिर

यह मंदिर विश्वनाथ मंदिर के सामने बना है इसकी सुंदरता भी देखने लायक है

देवी जगदंबा मंदिर

कंदारिया मंदिर के उत्तर में देवी जगदंबा का मंदिर है । यह मंदिर पहले भगवान विष्णु को समर्पित था । कुछ वर्षो पश्चात छतरपुर के राजा ने देवी पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर दी थी । जिस वजह से यह देवी जगदंबा के नाम से जाना जाने लगा ।यह मंदिर शर्दुलो के काल्पनिक चित्रण के लिए प्रसिद्ध है।

सूर्य (चित्रगुप्त मंदिर)

इस मंदिर में भगवान सूर्य की 7 फीट ऊची प्रतिमा है जो कि कवच धारण किये हुए है । इसमें भगवान सूर्य सात घोड़ों के रथ पर सवार है तथा दक्षिण की ओर 11 सिर वाली भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है । इस मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है।

पूर्वी समूह

पूर्वी समूह के मंदिरों को दो सम विषम समूहों में बांटा गया है । जिनकी उपस्थिति आज के गांधी चौक से शुरू हो जाती है । इस श्रेणी के चार मंदिरों का समूह प्राचीन खजुराहो गाँव के नजदीक है तथा दूसरे समूह में जैन मंदिर है जो गाँव के स्कूल के पिछे स्थित है

जावरी मंदिर

इस मंदिर का निर्माण 1075से 1100 ई में कराया गया था । इस मंदिर के तीन ओर पत्थर की सुंदर कारीगरी की गई है जोकि अत्यंत सुंदर दिखाई पडती है

वामन मंदिर

खजुराहो के पूर्वी समूह में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के बौने अवतार के सम्मान में बनाया गया था । इस मंदिर की सजावट के लिए शिकारा ओर महामंडप भी है  । इस मंदिर की दीवारों में अद्भुत नक्काशी की गई है।

आदिनाथ जैन मंदिर

आदिनाथ मंदिर में संवत के समय उनके आदर्श ओर अभिलेख स्थापित है ।

शांतिनाथ मंदिर

शांतिनाथ मंदिर आधुनिक समय की संरचना है जोकि बहुत से मंदिर ओर तीर्थ स्थानों में से एक है इस मंदिर में जैन धर्म के मुख्य आदर्श भगवान शांतिनाथ जी की 15 फीट ऊची प्रतिमा है।

दक्षिणी समूह

इस भाग में दो मंदिर है । एक भगवान शिव को समर्पित है ओर दुसरा भगवान विष्णु को समर्पित है ।

चतुर्भुज मंदिर

यह मंदिर 1100ई° में बनाया गया था । यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है । इस मंदिर की दीवारें चतुर्भुजा पत्थरों से बनी है । इस मंदिर की दीवारों में कामसूत्र कटेगरी कारीगरी की गई है  यह अद्भुत मंदिर है।

दुला देव मंदिर

दुला देव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । इस मंदिर में एक महामंडप बनाया गया है । जिसका आकार अष्टभुज जैसा है । इस अष्टभुज आकार वाले मंडप में 20 अप्सराएं दर्शाई गई है जोकि मुकुट व भारी आभुषण पहने हुए है

सोमनाथ मंदिर का इतिहास

कैसे पहुँचे

खजुराहो शहर का खुद का हवाई अड्डा है । यह शहर से दो किलोमीटर की दूरी पर है । यहाँ से भारत के प्रमुख शहरों के लिए सुविधा उपलब्ध है । इस शहर का प्रमुख रेलवे स्टेशन भी है जो भारत वर्ष के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है । सडक मार्ग द्वारा झांसी से प्राईवेट तथा सरकारी बस सेवा निरंतर उपलब्ध है।
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