Alvitrips

Touris place, religious place, history, and biography information in hindi
कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल – कुरूक्षेत्र के टॉप 10 दर्शनीय स्थल

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल – कुरूक्षेत्र के टॉप 10 दर्शनीय स्थल

कुरूक्षेत्र भारत की राजधानी दिल्ली से लगभग 170 किलोमीटर दूर है। यह नगर सरस्वती नदी के किनारे पर स्थित है। आर्य संस्कृति की उत्पत्ति और विकास इसी स्थान पर हुआ था। यही पर इंद्र, अग्नि, ब्रह्मा, दधीचि, अरूंधति तथा मार्कण्डेय आदि ऋषियो ने तप किया था। महर्षि मनु ने मनुस्मृति की रचना इसी स्थल पर की थी। कोरवो और पांडवो के बीच महाभारत का युद्ध इसी जगह पर हुआ था। कहा जाता है कि कौरवो और पांडवो के पूर्वज राजा कुरू ने अपने हाथो से यहा हल चलाया था। इसलिए इसे कुरूक्षेत्र के नाम से जाना जाता है। अपने इस लेख में हम आज अपने पाठको को कुरूक्षेत्र के दर्शनीय स्थल, करूक्षेत्र के पर्यटन स्थल, कुरूक्षेत्र में देखने लायक स्थान, कुरूक्षेत्र में दर्शनीय स्थान और कुरूक्षेत्र का भ्रमण करेगें और कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल के बारे में विस्तार से जानेगें।

 

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल – कुरूक्षेत्र तीर्थ की यात्रा

 

कुरूक्षेत्र में टॉप 10दर्शनीय स्थल

 

1. स्नेहत (सन्निहित)

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। यह तीर्थ स्थान कुरूक्षेत्र रेलवे स्टेशन से ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके चारो ओर अनेक प्राचीन मंदिर बने हुए है। महाभारत युद्ध के दौरान कौरव और पांडव संध्या के समय युद्ध बंद करके इसी तीर्थ स्थान में स्नान किया करते थे। और फिर आपस में इकट्ठे बैठकर प्रेमपूर्वक बाते किया करते थे। उनकी इस स्थान पर स्नेहयुक्त बाते होने के कारण ही इस स्थान का नाम स्नेहत (सन्निहित) पडा था। इससे पहले इस तीर्थ को पंचक तीर्थ कहा जाता था।

 

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थलो के सुंदर दृश्य

 

 

 

2.ब्रह्म सरोवर

स्नेहत के बाद कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में कुरूक्षेत्र का दूसरा पवित्र स्थान ब्रह्म सरोवर माना जाता है। यह विशाल सरोवर एशिया का सबसे बडा सरोवर माना जाता है। इसकी लंबाई चार हजार फुट और चौडाई दो हजार फुट है। इस तीर्थ स्थान को सभ्यता का गढ माना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने ब्रह्म सरोवर के किनारे बैठकर पूजा की थी। और शिवलिंग की स्थापना की थी। यह शिवलिंग आज भी सरोवर के मध्य में सरवेश्वर महादेव के मंदिर में स्थापित है। यह मंदिर एक छोटी सी पुलिया द्वारा घाट से जुडा हुआ है। यह मंदिर अपनी अनुपम छटा से पर्यटको को मुग्ध करता है। इस मंदिर में शिव पार्वती और गणेश जी की भी मूर्तिया स्थापित है। एक कक्ष में गरूड नारायण जी की संगमरमर की मुर्ति है तथा अन्य कक्षो में हनुमानजी, श्रीकृष्ण, और बलरामजी की मूर्तिया है।

ब्रह्म सरोवर के मध्य में ही चंद्र कूप है। यह एक प्राचीन स्थान माना जाता है। ब्रह्म सरोवर के दर्शन करने आए श्रद्धालु ब्रह्म सरोवर में स्नान करके इस कूप के दर्शन अवश्य करते है। यहा पर चंद्र ग्रहण, सोमवती, अमावस्या, बावन द्वादशी, फलगू तथा वैशाखी पर लाखो श्रद्धालु स्नान करने आते है। कहा जाता है कि ब्रह्म सरोवर में केवल एक डुबकी लगाना अश्वमेध यज्ञ आयोजित करने के समान है।

ब्रह्मसरोवर के समीप ही गीता भवन, पांडवो का मंदिर है। इस भवन का निर्माण सन् 1921-1922 में किया गया था। यहा एक पुस्तकालय है। जिसमे धार्मिक पुस्तको के अतिरिक्त देश की हर भाषा में गीता उपलब्ध है। पांडवो के मंदिय या बाबा श्रवण नाथ की हवेली में पांच पांडवो कौरवो श्रीकृष्ण और हनुमान जी की मूर्तिया है। पास में भीष्म पितामह जी की बाण शैया पर लेटे हुए मूर्ति है। इसके अलावा भगवान लक्ष्मी नारायण , भगवती दुर्गा एवं श्रवण नाथ जी की मूर्तिया है।

 

3.नरथानेश्वर महादेव मंदिर

यह अद्भुत मंदिर थानेश्वर में स्थित है। कहते हैकि महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए पांडवो ने भगवान शिव से यही आशिर्वाद प्राप्त किया था। यह मंदिर भगवान शिव का निवास स्थल भी माना जाता है। यहा एक आकर्षक सरोवर भी है। जिसके बारे में कहा जाता है कि राजा ताण को इस सरोवर के जल की कुछ ही बुंदो से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिल गई थी। थानेश्वर कस्बे के निकट ही कमल नाभि मंदिर है। जिसमे भगवान विष्णु और ब्रह्मा की मूर्तिया स्थापित है। कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में यह स्थान विशेष रूप से पूजनिय है।

 

4.नरकातारी भीष्म कुंड ( बाण गंगा)

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में यह स्थान कुरूक्षेत्र से 6 किलोमीटर की दूरी पर पेहवा रोड पर स्थित “नरकातारी गांव” के समीप नरकातारी भीष्म कुंड है। इसे बाण गंगा के नाम से भी जाना जाता है। इसी स्थान पर भीष्म पितामह अर्जुन के तीरो से घायल होकर बाण शैया पर लेटे थे। उन्होने अर्जुन से पीने के लिए जल मागा था। तब अर्जुन ने पृथ्वी में बाण मारकर जल की उत्पत्ति की थी। जिसे पीकर पितामह तृप्त हुए थे।

एक किवदंती के अनुसार इस बाण गंगा में स्नान करने से कोई भी व्यक्ति जिसने पाप का अन्न खाया हो। पापमुक्त हो जाता है। यहा पर भीष्म पितामह, तारकेश्वर महादेव, पंचमुखी हनुमान, श्री गंगा जी तथा श्री राम – सीता की प्राचीन मूर्तिया भी है। जो दर्शको को आकर्षित करती है।

कुरूक्षेत्र में तीन बाण गंगा है। दूसरी बाण गंगा ब्रह्म सरोवर से दक्षिण की ओर साढे 6 किलोमीटर की दूरी पर है। यहा जयद्रथ वध के दौरान अर्जुन ने अपने घोडो को प्यासा देखकर पृथ्वी में बाण चलाकर बाण गंगा की उत्पत्ति की थी। और अपने प्यासे घोडो को पानी पिलाया था। यह बाण गंगा दयालपुर गांव के पास है।

तीसरी बाण गंगा कुरूक्षेत्र रेलवे स्टेशन से 9 किलोमीटर की दूरी पर जमीन गांव के समीप है। यहा एक बहुत बडी खाई है। जिसमे कर्ण के रथ का पहिया फंस गया था। उस समय यही पर अर्जुन ने अपने बाणो से कर्ण को घायल किया था। कर्ण के मरने से पहले भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ब्राह्मण का वेश धारण करके कर्ण की दानवीरता की परिक्षा लेने उसके पास आए थे और उससे उसका सोने का दांत दान में मांगा था। कर्ण ने अपना सोने का दांत उखाडकर उसे धोने के लिए जमीन पर बाण चलाकर जल की धारा उत्पन्न की थी। और फिर उस दिव्य जल से दांत धोकर दान किया था।

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढे:–

ब्रह्म सरोवर कुरूक्षेत्र

शेखचिल्ली का मकबरा

रोज गार्डन चंडीगढ

शाहकुम्भरी देवी सहारनपुर

 

5. ज्योतिसर

यह स्थान कुरूक्षेत्र रेलवे स्टेशन से 8 किलोमीटर की दूरी पर पेहवा रोड पर सरस्वती नदी के तट पर स्थित है। इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। यहा पर प्रत्येक वर्ष शीत ऋतु में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मार्गशीर्ष के महीने में 18 दिन तक गीता जयंती मनाई जाती है। यहा पर कृष्ण-अर्जुन का रथ तथा शंकराचार्य का मंदिर है। यहा स्नान आदि के लिए नरवाणा शहर से शुद्ध और ताजा जल उपलब्ध होता है।

 

6. फल्गू

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में यह स्थान कुरूक्षेत्र से 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार इस स्थान पर भगवान ब्रह्मा की प्रार्थना पर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए थे। यहा एक पवित्र कुंड है जिसके घाटो को लाल पत्थरो से सजाया गया है। कहा जाता हैकि इस कुंड में डुबकी लगाने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है। स्थानीय भाषा में इस स्थान को फुर्ल कहा जाता है।

 

7. कलकत

यह पवित्र क्षेत्र कुरूक्षेत्र से लगभग 70 किलोमीटर दूर कैथल निखाना मार्ग पर स्थित है। इस कस्बे का नाम प्रभु कर्दम ऋषि (ब्रह्मा केपुत्र) के दसवे पुत्र मुनि के नाम से है। यहा के कुंड में कार्तिक पूर्णिमा को असंख्य श्रद्धालु। स्नान करते है। कहा जाता है कि इस कुंड के जल में सभी बिमारियो को ठीक करने की शक्ति  है। इस कुंड के पास ही कत्यायनी देवी का मंदिर भी है जो कि विशेष रूप से दर्शनीय है।

 

8. शेख चिल्ली का मकबरा

यह मकबरा कुरूक्षेत्र से ढाई किलोमीटर की दूरी पर थानेश्वर के निकट है। तजकारते औलिया के अनुसार हजरत शेखचिल्ली जो कि सूफी सम्प्रदाय के ईरानी संत थे। इस मकबरे का निर्माण कुतुब जलालुद्दीन ने करवाया था। कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में यह खुबसूरत इमारत एक अच्छा पर्यटन स्थल है।

 

9. कुरूक्षेत्र का गुरूद्वारा

अपनी कुरूक्षेत्र यात्रा के दौरान गुरू नानक जी ने इसी स्थान पर विश्राम किया था। यह गुरूद्वारा सिद्धवती के नाम से मशहूर है। स्नेहत ताल के समीप यह गुरूद्वारा गुरू हरगोविंद जी को समर्पित है।

 

10. पेहवा

यह स्थान कुरूक्षेत्र से पश्चिम दिशा में लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक पितृ तीर्थ है। यहा पिण्डदान का महत्व हरिद्वार, काशी तथा गया जैसे तीर्थो के समान माना जाता है। यहा बहुत से प्राचीन मंदिर है। जिनमे से अधिकांश का निर्माण राजा भोजदेव ने सन् 1882 के आस पास करवाया था।

 

 

कुरूक्षेत्र कैसे पहुंचे

वायु मार्ग द्वारा:- करूक्षेत्र का करीबी हवाई अड्डा चंडीगढ है। यहा से आप बस टैक्सी द्वारा आसानी से कुरूक्षेत्र जा सकते है।

रेल मार्ग द्वारा:- कुरूक्षेत्र रेलवे जंक्शन होने के कारण प्रमुख शहरै से रेल मार्ग द्वारा जुडा हुआ है। देश के कई प्रमुख शहरो से यहा के लिए सिधी रेल सेवाएं है।

सडक मार्ग द्वारा:– कुरूक्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग से जुडा हुआ शहर है। इसलिए देश के प्रमुख नगरो से यहा के लिए सिधी बस सेवाए उपलब्ध है।

 

 

कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल, कुरूक्षेत्र पर्यटन स्थल, कुरूक्षेत्र तीर्थ यात्रा, कुरूक्षेत्र में देखने लायक स्थान, कुरूक्षेत्र के दर्शनीय स्थल आदि शीर्षको पर आधारित हमारा यह लेख आपको कैसा लगा आप हमे कमेंट करके बता सकते है। यह जानकारी आप अपने दोस्तो के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते है।

write a comment