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ओलंपिक खेल का इतिहास – ओलम्पिक गेम हिस्ट्री इन हिन्दी

ओलंपिक खेल का इतिहास – ओलम्पिक गेम हिस्ट्री इन हिन्दी

ओलंपिक खेल विश्व का सर्वाधिक प्रतिष्ठित खेल आयोजन है। इसे समर ओलंपिक भी कहा जाता है। किसी भी खिलाड़ी की यह सबसे बडी इच्छा होती है कि वह एक बार ही सही ओलंपिक खेलों का विजेता जरूर बने। सम्पूर्ण विश्व में खेल का मानक माना जाने वाला यह महत्वपूर्ण आयोजन प्रति पांच वर्ष के बाद होता है। और सम्पूर्ण विश्व के महानतम खिलाड़ी इस आयोजन में भाग लेते है। ओलंपिक खेलों की शुरूआत कैसे हुई ? यह एक विवाद का विषय हो सकता है, पर आम मान्यताओं के अनुसार इसका प्रारंभ ओलम्पिया नगर से हुआ माना जाता है। ओलम्पिया यूनान राज्य का एक नगर था। उस समय यूनान साहित्य, कला और संस्कृति का केंद्र था, इसलिए यदि यूनान में ओलंपिक का प्रारंभ किसी सांस्कृतिक उत्सव के रूप में हुआ हो तो उस पर अविश्वास नहीं किया जा सकता है। ओलंपिक खेलो के प्राचीन इतिहास के संबंध में यह मान्यता है कि स्पार्टा और एथेन्स में हुए भयानक युद्ध के नायक फिडीपीडीज की याद उस समय सबसे पहले ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया जो अनवरत चलता रहा। आधुनिक काल में सर्वप्रथम ओलंपिक खेलों का आयोजन सन् 1896 में यूनान में हुआ था। बरेन पियरे द कुवर्ते को इसका श्रेय दिया जाता है और इन्हें आधुनिक ओलंपिक खेलो का जन्मदाता माना जाता है।

ओलंपिक शुभारंभ
ओलम्पिक शुभारंभ

इस महान खेल प्रतिस्पर्धा में समय समय पर कुछ विशेष नियमों का गठन भी किया गया जो प्रत्येक बार ओलंपिक खेल प्रारंभ होने से पहले पूरा किया जाता है। सर्वप्रथम ओलम्पिक शुभंकर की बात करें तो सर्वप्रथम ओलम्पिक शुभंकर प्रायः आयोजक राष्ट्र का राष्ट्रीय पशु या पक्षी होता है। मैक्सिको सिटी में आयोजित 16वें ओलम्पिक के समय जो शुभंकर अपनाया गया वह ओलम्पिक खेलों के इतिहास में पहला शुभंकर था। उसका नाम था पालोमा इसके बाद 30वे लंदन ओलम्पिक 2012 में जो शुभंकर अपनाया गया उसका नाम था वेनलॉक मैण्डेविल।

ओलंपिक खेल का उद्देश्य



विश्व के इस महानतम खेल प्रतिस्पर्धा का अपना एक चार्टर है। जिसमें ओलम्पिक से संबंधित उद्देश्य उल्लेखित है। 1894 में संकलित इस चार्टर के अनुसार इस खेल आयोजन का उद्देश्य है — खेलों के लिए आवश्यक शारीरक एवं नैतिक गुणों का विकास करना, सम्पूर्ण विश्व में ओलम्पिक सिद्धांतों का प्रसार करके अंतरराष्ट्रीय सद्भावना उत्पन्न करना, विश्व शांति को और सशक्त बनाने के लिए खेलों के माध्यम से युवाओं में आपसी सद्भावना और मित्रता बढ़ाना, विश्व के सभी खिलाड़ियों को प्रति चार वर्ष पश्चात एक स्थान पर एकत्र करना।

ओलम्पिक खेल ध्वज




ओलम्पिक खेलों का अपना एक ध्वज है। सन् 1914 में पियरे द कुवर्ते के सुझाव पर ही यह ध्वज बनाया गया था। इस ध्वज को सर्वप्रथम एंटवर्प ओलम्पिक सन् 1920 में फहराया गया। यह ध्वज सिल्क का बना होता है जिस पर आपस में जुडे पांच छल्ले अंकित होते है। इन छल्लों का रंग क्रमशः नीला, पीला, काला, हरा एवं लाल होता है।

ओलंपिक खेल चिन्ह




अब बात करते है ओलंपिक चिन्ह की, यह चिन्ह 1920 में निश्चित किया गया था। इस चिन्ह को निर्मित करने का श्रेय आधुनिक ओलम्पिक खेलों के जनक पियरे द कुवर्ते को जाता है। ओलम्पिक चिन्ह आपस में जुडे पांच छल्ले है। जो इसके ध्वज पर अंकित होते है। इनका रंग क्रमशः ऊपर बताये अनुसार होता है। ओलम्पिक गेम चिन्ह निष्पक्ष एवं मुक्त स्पर्धा का प्रतीक है। ये पांच छल्ले पांच प्रमुख महाद्वीपों — अफ्रीका, अमरीका, एशिया, आस्ट्रेलिया, व यूरोप को दर्शाते हैं।

ओलंपिक खेल चिन्ह
ओलंपिक चिन्ह





जिस प्रकार किसी भी देश का अपना एक राष्ट्रगान होता है उसी प्रकार ओलंपिक खेलों का भी अपना एक गान है। ओलम्पिक गीत की रचना 19वी शताब्दी में यूनान के संगीतकारों — स्पिरॉस सामारास एवं कोस्तिम पाला मास ने की थी। सन् 1958 में अंतरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति ने इसे मान्यता प्रदान की। यही गान प्रत्येक ओलम्पिक खेल के उद्घाटन एवं समापन समारोह में गाया जाता है।

ओलम्पिक मशाल


ओलम्पिक खेलों में एक मशाल होती है जो प्रत्येक ओलम्पिक गेम्स का श्रीगणेश करती है। ओलम्पिक मशाल ओलम्पिक खेल प्रारंभ होने से कुछ दिन पूर्व यूनान के ओलम्पिया गांव के जियस के मंदिर से लाई जाती है। वहां इसे सूर्य की किरणों से प्रजवलित किया जाता है। प्रथम विश्व युद्ध के कारण कुछ समय के लिए यह परम्परा बंद कर दी गई थी। बर्लिन ओलम्पिक 1936 में ओलम्पिक मशाल जलाने की प्रथा को पुनः शुरू किया गया। इसी मशाल से स्टेडियम की मशाल प्रजवलित की जाती है।

ओलंपिक खेल मशाल
ओलम्पिक खेल मशाल




ओलम्पिक खेलों में प्रतिभागियों को एक शपथ भी लेनी पड़ती है। ओलम्पिक गेम शपथ की शुरुआत 1920 के एंटवर्प ओलम्पिक गेम से ही हुई थी। खेल प्रारंभ होने से पूर्व सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों की ओर से कोई एक वरिष्ठ खिलाड़ी शपथग्रहण कराता है।

ओलम्पिक पदक


ओलम्पिक खेलों मे मुख्य बात है इसमें शामिल होना न कि जीतना क्योंकि जीत तो खिलाड़ी के प्रयासों पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक स्पर्द्धा में जमकर मुकाबला करना आवश्यक है। ओलम्पिक का आदर्श वाक्य है — और तेज, और ऊंचा, और बलशाली ( अल्टियस, सिटियस, फोर्टियस ) ओलम्पिक खेलों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को स्वर्ण पदक, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को रजत पदक तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को कांस्य पदक से सम्मानित किया जाता है। चतुर्थ से आठवां स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को केवल प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया जाता है।

ओलंपिक गान
एथलीट ओलम्पिक गान करते हुए



प्रथम ओलम्पिक खेल 1896 एथेंस यूनान में हुआ था। इस प्रथम प्रतियोगिता में केवल पुरूष खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इस ओलम्पिक खेल में भारत ने भाग नहीं लिया था। दूसरा ओलम्पिक खेल सन् 1900 पेरिस फ्रांस में सम्पन्न हुआ हुआ था भारत ने इसमें भाग लिया और दो रजछ पदक प्राप्त किए। तीसरा ओलम्पिक खेल 1904 सेंटलुइस अमेरिका में हुआ भारत ने इसमें भी भाग नहीं लिया। चौथा ओलम्पिक खेल 1908 लंदन ब्रिटेन में सम्पन्न हुआ था। इस प्रतियोगिता में भी भारत ने भाग नहीं लिया था। पांचवाँ ओलम्पिक खेल 1912 में स्टाकहोम स्वीडन मे हुआ था। इसमें भी भारत ने भाग नहीं लिया। छठे ओलम्पिक सन् 1916 में कोई कार्य नहीं हुआ, यह खेल विश्वयुद्ध के कारण निरस्त हो गया था, इसका आयोजन बर्लिन जर्मनी में होने वाला था। सातवां ओलम्पिक खेल 1920 एंटवर्प बेल्जियम में हुआ था। इसमें भारत की स्थिति समान्य रही। भारत की यही स्थिति आठवें ओलम्पिक 1924 पेरिस फ्रांस में भी बरकरार रही। नवां ओलम्पिक खेल 1928 में एमस्टर्डम हालैंड में हुआ था। इस प्रतियोगिता मे भारतीय टीम ने हॉकी में स्वर्ण पदक जीता था। दसवां ओलम्पिक गेम 1932 में लॉसएंजिल्स में हुआ, इसमें भी भारत की हॉकी टीम की स्थिति स्वर्ण पदक जीतने वाली बनी रही और फिर से 1936 में ग्यारहवें ओलम्पिक प्रतियोगिता में भारत ने हॉकी में स्वर्ण पदक की लडी लगा दी। यह ओलम्पिक खेल बर्लिन जर्मनी में सम्पन्न हुआ था। बारहवां ओलम्पिक खेल 1940 मे द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण न हो सका और निरंतर युद्ध की स्थिति बने रहने के कारण तेहरवां ओलम्पिक खेल 1944 में भी न हो सका। उसके बाद प्रति चौथे वर्ष यह खेल नियमित तौर पर आयोजित होता आ रहा है।

शीतकालीन ओलम्पिक खेल




शीतकालीन ओलम्पिक खेल ठंडे मौसम मे खेले जाने वाले खेलों जैसे स्काईंग, आइस हॉकी, अल्पाइन स्काईंग प्रतियोगिताओं के लिए आयोजित किया जाता है। शीतकालीन ओलम्पिक खेलों का आयोजन प्रथम बार सन् 1924 से शुरू किया गया था। ओलम्पिक खेलो के अन्य रूप भी है, यूथ ओलम्पिक गेम्स, एनसिएंट ओलम्पिक गेम्स।

ओलंपिक खेल के कुछ रोचक तथ्य





• ओलंपिक खेलों की शुरूआत प्राचीन काल में 776 ईसवीं पूर्व शुरू हुई थी।
• आधुनिक ओलम्पिक खेलों की शुरुआत 1896 में एथेंस से हुई थी।
• ओलम्पिक खेलों का जनक पियरे द कुवर्ते को माना जाता हैं।
• ओलम्पिक में पांच अंगूठियां पांच महाद्वीपों को चिन्हित करती है।
• ओलम्पिक मशाल को सर्वप्रथम एनारिक्वेता बासीलीओ ने प्रज्वलित किया था।
• ओलम्पिक खेलों का आयोजन प्रत्येक चार वर्ष बाद होता है।
• आज तक चार बार ओलम्पिक खेल नहीं हुए है। 1916 में 1940 में 1944 में तीनों बार खेल का आयोजन न होने का कारण विश्वयुद्ध की परिस्थितियाँ रही। चौथा वर्तमान 2020 मे जो टोक्यो जापान में होना था। जो फिलहाल कोरोना वायरस की महामारी के चलते फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
• ओलम्पिक खेलों के पहले शुभंकर का नाम पालोमा था।
• ओलम्पिक खेलों में जलने वाली मशाल यूनान के ओलम्पिया नामक नगर में स्थित जियस के मंदिर से लाई जाती है।
• सर्वप्रथम ओलम्पिक खेलों में हॉकी ने 1928 में प्रवेश किया।
• सर्वप्रथम ओलंपिक खेलो में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1980 में प्रवेश किया।
• मिल्खा सिंह ओलम्पिक खेलो की प्रतियोगिता में एथलेटिक्स प्रति स्पर्धाओं के फाइनल मे पहुंचने वाले प्रथम भारतीय एथलीट थे।
• लगातार चार बार ओलम्पिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व लेस्ली क्लाडियस और उधमसिंह ने किया।
• ओलम्पिक में सर्वाधिक बार शामिल होने का विश्व रिकॉर्ड आर के रणधीर सिंह के नाम है।
• भारत ने सर्वाधिक बार हॉकी में आठ बार स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
• भारत की ओर से मिल्खा सिंह ओलम्पिक में पदक प्राप्त करने पहले एथलीट है।

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