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एशिया की सबसे बडी मस्जिद – ताज-उल मस्जिद भोपाल

प्रिय पाठको अपने इस लेख में आज हम आपको एक ऐसी रोचक जानकारी देने जा जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होगें। क्या आप जानते है एशिया की सबसे बडी मस्जिद कहां है? क्या आप जानते है एशिया की सबसे बडी मस्जिद कौनसी है?  शायद यह आप नही जाते हो! तो चलिए हम आपको बता देते है। एशिया की सबसे बडी मस्जिद भारत के भोपाल शहर में स्थित है। भोपाल शहर में स्थित ताज-उल मस्जिद ही क्षेत्रफल के हिसाब से एशिया की सबसे बडी मस्जिद है।

 

एशिया की सबसे बडी मस्जिद
ताज उल मस्जिद भोपाल के सुंदर दृश्य

 

 

तो चलिए दोस्तो आगे के अपने इस लेख में हम एशिया की सबसे बडी मस्जिद ताज-उल मस्जिद के बारे में विस्तार से जानते है।

 

एशिया की सबसे बडी मस्जिद

 

 

भारत के भोपाल शहर में स्थित ताज-उल मस्जिद का निर्माण कार्य शाहजहां बेगम ने सन् 1868 में शूरू काराया था। उनके जिते जी इस मस्जिद का निर्माण कार्य पूरा न हो सका। उनकी मत्यु के बाद धन की कमी के कारण उनके वंशज भी इस मस्जिद के निर्माण को पूरा नही करा सके। बाद में मौलाना मौहम्द इमरान खां के प्रयासो से इस मस्जिद का निर्माण कार्य सन् 1970 पूरा हुआ।

 

 

दोस्तो यह तो हमने जान ही लिया की ताज-उल मस्जिद का निर्माण किसने कराया और किन परिस्थियो में यह कार्य पूर्ण हुआ आइए आगे के इस लेख में जाने है कि यह एशिया की सबसे बडी मस्जिद क्यो कही जाती है। जबकि भारत की सबसे बडी मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद को माना जाता है।

 

ताज-उल मस्जिद भोपाल एशिया की सबसे बडी मस्जिद क्यो है?

 

शाहजहा बेगम ने दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी एक बडी मस्जिद बनवाने का ख्वाब देखा था। जिसको वह भोपाल में बनवाना चाहती थी। अपनी इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होने उस समय के वास्तुकारो से एक आलिशान बडी मस्जिद का नकशा तैयार कराया। इस मूल नक्शे के हिसाब से मस्जिद के बाहर एक तालाब वुजू के लिए मोतिया तालाब बनाया गया था।

 

 

ताज उल मस्जिद भोपाल एशिया कि सबसे बडी मस्जिद के सुंदर दृश्य
ताज उल मस्जिद भोपाल एशिया कि सबसे बडी मस्जिद के सुंदर दृश्य

 

800×800 के मोतिया तालाब और मस्जिद के क्षेत्रफल को मिलाकर ताज-उल  मस्जिद का कुल क्षेत्रफल 14 लाख 52 हजार स्क्वेयर फीट है। अपने इसी लम्बे चौडे क्षेत्रफल के यह एशिया की सबसे बडी मस्जिद है। हांलाकि वर्तमान समय में तालाब का पानी गंदा होने के कारण वुजू के लिए इसका इस्तेमाल नही किया जाता है।

 

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ताज-उल मस्जिद का स्थापत्य

मस्जिद में दो 18 मंज़िला ऊंची मिनारे हैं जो संगमरमर के गुंबज़ो से सजी है। इसके अलावा मस्जिद में तीन बड़े गुंबज़ भी है। जिनसे मस्जिद में चार चांद की खूबसूरती नजर आती है। मस्जिद में एक बड़ा सा दालान, संगमरमर का फर्श और स्तम्भ हैं।

 

 

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